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साहब! ‘मजदूरी तो कभी भी हो जाएगी, पहले जान बचाएं’, दिल्ली छोड़कर जाने वालों ने बयां किया दर्द

Thu, 27 Feb 2020 10:29 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 27 Feb 2020 10:29 AM IST
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delhi violence affected areas continue to flee by Workers
delhi violence - फोटो : अमर उजाला
साहब कई साल से यहां रहकर मजदूरी कर बच्चों का पेट पालते थे, लेकिन चार दिन से जारी हिंसा ने अपने मूल घर जाने के लिए मजबूर कर दिया है। किसी कानून के विरोध या समर्थन से हमारा कोई लेना-देना नहीं। हमें तो केवल रोजी-रोटी का सहारा मिल जाए। इस हिंसा के बाद वह भी छिन गया है। अब तो बच्चों का पेट तक पालना मुश्किल है। यह दर्द उन लोगों का है, जो बड़ी उम्मीदों के साथ दिल्ली में परिवार की रोजी-रोटी कमाने आए थे, लेकिन सीएए विरोधियों और समर्थकों के बीच जारी हिंसा में फंस गए। 
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delhi violence - फोटो : अमर उजाला
बुधवार को लगातार चौथे दिन भी उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों में छिटपुट हिंसा की घटनाओं के बीच फंसे पूर्वांचली व बिहारी मजूदरों का जाफराबाद, मौजपुर, भजनपुरा और सीलमपुर समेत कई इलाकों से पलायन जारी रहा। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़कने के बाद से मजदूरों का पलायन शुरू हो गया था। पुलिस और प्रशासन सड़कों पर उतरकर लोगों से वापस न लौटने की अपील कर रहा है, लेकिन डरे-सहमे लोग इलाका छोड़ रहे हैं। 
delhi violence affected areas continue to flee by Workers
delhi violence - फोटो : अमर उजाला
मौजपुर इलाके में काम करने वाले राम कुमार का कहना है कि उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। अब तक उनके हजारों साथी घर वापस चले गए हैं। करावल नगर के पास मजदूरों का एक झुंड स्टेशन जाने के लिए ऑटो का इंतजार में खड़ा दिखा। बिहार के आरा जिले के अनिल ने बताया कि मजदूरी करने के बाद घर लौट रहे उनके कई साथी हिंसा में घायल हो गए हैं। 
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delhi violence - फोटो : अमर उजाला
इसलिए वे अपनी जान की सलामती के लिए घर के लिए निकल रहे हैं। दूसरे मजदूरों का कहना है कि हिंसा होने से इलाके का कारोबार पूरी तरह ठप है। उन्हें कई दिन से मजदूरी भी नहीं मिल रही है. इस वजह से बच्चों का पेट तक भर पाना मुश्किल है। हिंसाग्रस्त इलाके में करीब 25 हजार दिहाड़ी मजदूर थे। ये विभिन्न इलाकों में किराये के मकानों में रह रहे थे। कर्फ्यू जैसे हालात होने के बाद वे भी अपने घरों की ओर लगातार पलायन कर रहे हैं।
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delhi violence - फोटो : अमर उजाला
घरों पर ताले, रिश्तेदारों के घर में पनाह
उत्तरी-पूर्वी जिले में हिंसा के बाद मिश्रित आबादी वाले इलाकों में दोनों समुदायों के कई घरों में ताले जड़ गए हैं। जान की सलामती के लोग रिश्तेदारों के घरों में पनाह लेने के लिए निकल गए हैं। हर किसी को डर अब भी सता रहा है कि कब कौन उपद्रवी उनके घर में घुसकर हिंसा कर डाले। उधर, पुलिस लोगों को सुरक्षा का भरोसा दे रही है।
 
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