दिल्ली के जैतपुर के हरिनगर पार्ट-2 में बनीं झुग्गियों में लोग बारिश रुकने का इंतजार कर रहे थे। अमूमन सभी लोग सात-आठ बजे तक काम पर निकल जाते थे लेकिन शुक्रवार रात से हो रही बारिश की वजह से सभी अपनी-अपनी झुग्गियों में थे। इसी दौरान शनिवार सुबह अचानक धड़ाम की आवाज आई और मौके पर चीख-पुकार मच गई।
आसपास मौजूद लोगों ने तेज आवाज और फिर लोगों के चिल्लाने की आवाज सुनी तो मौके की ओर भागे। लोगों ने देखा कि चौधरी साहब की समाधि की दीवार झुग्गियों पर आ गिरी थी। लकड़ी के फट्टों और तिरपाल से बनीं झुग्गियां कागज की तरह ढह चुकी थीं। मलबे में से लोगों के चिल्लाने की आवाज आ रही थी।
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जैतपुर में गिरी दीवार
- फोटो : अमर उजाला
हसीबुल की टूटी कमर की हड्डी
वहीं से किसी ने पुलिस को कॉल की और मदद को भागे। सबसे पहले हसीबुल को मलबे से निकालकर एक जगह लिटाया गया। उसकी कमर की हड्डी टूटी हुई थी, शरीर में बाकी जगह भी फ्रेक्चर लग रहा था।
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जैतपुर में गिरी दीवार
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पड़ोसियों ने मलबे से लोगों को निकालना शुरू किया। खून से लथपथ कुछ लोगों की सांसें थम चुकी थीं। कुछ लोगों की सांसें अटक-अटककर आ रही थीं। इस बीच पुलिस भी पहुंच गई। शुरुआत में पांच-छह पुलिसकर्मी पहुंचे लेकिन बाद में पूरे थाने को ही बचाव के लिए मौके पर बुला लिया।
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जैतपुर में गिरी दीवार
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हादसे की सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ऐश्वर्या शर्मा व एसीपी रवि शंकर भी मौके पर पहुंच गए। बाद में पुलिस उपायुक्त डॉ. हेमंत तिवारी व अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।
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जैतपुर में गिरी दीवार
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ऑटो, पीसीआर वैन और एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल भेजा गया। कुछ ने अस्पताल जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। कुछ की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। पड़ोसी आनंद ने बताया कि सबसे पहले वह ही बचाव के लिए पहुंचा था।