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दिल्ली में 7 की मौत: परवीना के सामने ही मौत के मुंह में समा गए पति-बेटी, देवरानी और उसकी पुत्री ने भी तोड़ा दम
Sun, 10 Aug 2025 11:08 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 10 Aug 2025 11:08 AM IST
सार
दिल्ली के जैतपुर में समाधि स्थल की दीवार झुग्गियों पर गिर गई। मलबे में दबने से दो मासूमों समेत सात की मौत हो गई, जबकि एक की हालत नाजुक है। राजधानी में बारिश के दौरान बड़ा हादसा हुआ है।
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दिल्ली के जैतपुर में गिरी दीवार
- फोटो : अमर उजाला
सुबह के नौ बज रहे थे, चाय-नाश्ता करने के बाद सभी अपनी-अपनी झुग्गी में बैठे हुए थे। रबीबुल की पत्नी परवीना को खाना बनाने की चिंता सता रही थी। उसने पति से खाना बनाने की बात की और कुछ सामान लेने के लिए बाहर निकली। जैसे ही झुग्गी से बाहर आई तो तेज आवाज के साथ 10 फीट ऊंची दीवार झुग्गियों पर आ गिरी।
जैतपुर के हरिनगर में दीवार गिरने से झुग्गी में रहने वाले सात लोगों की मौत, विलाप करते परिजन
- फोटो : जी पाल
हादसे में परवीना के पति, बेटी, देवरानी और उसकी बेटी की मौत हो गई जबकि देवर हसीबुल जिंदगी के लिए अस्पताल में जंग लड़ रहा है। अब बार-बार परवीना रोते-रोते बेहोश हुए जा रही थी। बाकी परिजन उसको समझाने का प्रयास कर रहे थे। एक साथ कई लोगों की मौत की खबर सुनकर उनके आसपास रहने वाले रिश्तेदार वहां जमा हो गए।
दिल्ली के जैतपुर में गिरी दीवार
- फोटो : अमर उजाला
लकड़ी और तिरपाल की मदद से बनाई हैं झुग्गियां
एक परिजन ने बताया कि पश्चिम बंगाल और असम के रहने वाले करीब 20-25 परिवार प्लॉट में झुग्गी डालकर यहां रह रहे हैं। लोगों ने लकड़ी और तिरपाल की मदद से झुग्गियां बनाई हैं। प्लॉट मालिक उनसे एक-एक हजार रुपये किराये भी वसूलता है। सभी लोग प्लास्टिक का कूड़ा इकट्ठा करके लाते हैं।
एक परिजन ने बताया कि पश्चिम बंगाल और असम के रहने वाले करीब 20-25 परिवार प्लॉट में झुग्गी डालकर यहां रह रहे हैं। लोगों ने लकड़ी और तिरपाल की मदद से झुग्गियां बनाई हैं। प्लॉट मालिक उनसे एक-एक हजार रुपये किराये भी वसूलता है। सभी लोग प्लास्टिक का कूड़ा इकट्ठा करके लाते हैं।
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रुबीना का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दिहाड़े मजदूरी भी करते हैं कुछ लोग
बाद में यहां मौजूद महिलाएं इस कूड़े को अलग-अलग कर बेच देती हैं। इस पूरे काम में परिवार को 400 से 500 रुपये बच जाते हैं, उसी से पूरे परिवार का खर्चा चलाते हैं। कुछ लोग दिहाड़े मजदूरी भी करते हैं। पिछले तीन साल से परिवार इन झुग्गियों में रह रहे हैं।
बाद में यहां मौजूद महिलाएं इस कूड़े को अलग-अलग कर बेच देती हैं। इस पूरे काम में परिवार को 400 से 500 रुपये बच जाते हैं, उसी से पूरे परिवार का खर्चा चलाते हैं। कुछ लोग दिहाड़े मजदूरी भी करते हैं। पिछले तीन साल से परिवार इन झुग्गियों में रह रहे हैं।
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रुकसाना का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मोइना हुई अनाथ
दूसरी ओर एक झुग्गी में मुत्तू अली बेटी मोइना (12) के साथ रह रहा था। मुत्तू अली की पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी थी। उसकी एक ही बेटी है। शनिवार को हुए हादसे के समय मोइना बाहर निकली थी। इस बीच दीवार गिरी और मुत्तू की मौत हो गई। अब मोइना अनाथ हो गई है। उसके माता-पिता दोनों की मौत हो चुकी है। बच्ची को फिलहाल पड़ोसियों ने अपने पास रखा हुआ है।
दूसरी ओर एक झुग्गी में मुत्तू अली बेटी मोइना (12) के साथ रह रहा था। मुत्तू अली की पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी थी। उसकी एक ही बेटी है। शनिवार को हुए हादसे के समय मोइना बाहर निकली थी। इस बीच दीवार गिरी और मुत्तू की मौत हो गई। अब मोइना अनाथ हो गई है। उसके माता-पिता दोनों की मौत हो चुकी है। बच्ची को फिलहाल पड़ोसियों ने अपने पास रखा हुआ है।