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दिल्लीः 31 हजार रुपए नहीं दिए तो ILBS अस्पताल ने मरीज को पांच दिन तक बनाया बंधक

Wed, 02 May 2018 04:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 02 May 2018 04:55 PM IST
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delhi government ilbs hospital hostages to a patient for 5 days as he was unable to pay 31000 rupees
ilbs hospital

दिल्ली सरकार के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलेरीज साइंसेज (आईएलबीएस) अस्पताल पर एक मरीज को पांच दिन तक बंधक बनाने का आरोप लगाया गया है। दरअसल, मरीज के परिजन अस्पताल को 31 हजार का भुगतान नहीं कर पा रहे थे।

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पीड़ित परिवार का आरोप है कि वह नर्स से लेकर डॉक्टर तक के आगे हाथ जोड़ते रहे। यहां तक की बीजेपी सांसद मनोज तिवारी, केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे सहित तमाम बिहार के नेताओं के पास जाकर गुहार लगाई। लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।
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वहीं, पांच दिन बाद मरीज की हालत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उनके भाई से लिखित में लेकर कहा कि एक हम मरीज को छोड़ रहे हैं, एक महीने में पेमेंट नहीं किया तो कानूनी कार्रवाई करेेंगे। 

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पांच दिन तक तड़पता रहा मरीज

delhi government ilbs hospital hostages to a patient for 5 days as he was unable to pay 31000 rupees
ilbs hospital - फोटो : अमर उजाला

बिहार के रोहतास जिला निवासी बीरेंद्र कुमार (34) को पीलिया के चलते आईएलबीएस में 6 अप्रैल को भर्ती कराया था। बहन कौशल्या देवी ने बताया कि करीब सप्ताह भर बाद डॉक्टरों ने कहा कि मरीज का लिवर प्रत्यारोपण होना है।

15 लाख रुपये का खर्चा आएगा। परिजन घबरा गए, किसान होने के कारण उनके पास घर और जमीन के अलावा कुछ नहीं था। चिकित्सकों से भी परिवार वालों ने यह बता बताई। मगर प्रबंधन के समक्ष चिकित्सक खामोश रहे।

कौशल्या ने बताया कि इस बीच वह ढाई लाख का भुगतान कर चुके थे। 22 अप्रैल को 83 हजार का बिल पकड़ा कर मरीज को लेकर जाने के लिए कहा गया। कौशल्या ने बताया कि उसने जमीन बेचकर ढाई लाख का भुगतान किया था।

अब जेवर बेच कर 52 हजार एकत्र कर लिये थे। वह बाकी 31 हजार का भुगतान करने में असमर्थ हैं। लेकिन चिकित्सकों ने एक नहीं सुनी। पांच दिन तक मरीज को न दवा दी गई न ही कोई जांच की गई। मरीज तड़पता रहा और चिकित्सक शांत रहे।

रिश्तेदारों ने की मदद 

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ilbs hospital

कौशल्या ने बताया कि जब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई तो उन्होंने शाहदरा स्थित रिश्तेदारों को जानकारी दी। वह ईडब्ल्यूएस कमेटी के सदस्य और हाईकोर्ट के वकील डा. अशोक अग्रवाल के पास पहुंचे। डा. अग्रवाल ने द्वारका स्थित वेंकटेश्वर अस्पताल से बात की और मरीज को ईडब्ल्यूएस वर्ग के तहत भर्ती कराया।  उसका पीलिया 28 तक पहुंच गया है। जबकि आईएलबीएस में यह लगभग 12 से 16 के बीच में था।

फिलहाल प्रत्यारोपण की जरूरत नहीं
वेंकटेश्वर अस्पताल आने पर पता चला कि मरीज को फिलहाल लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता नहीं है। सबसे पहले उनका पीलिया नियंत्रण में लाना है। जबकि कौशल्या का कहना है कि आईएलबीएस के अस्पताल तत्काल प्रत्यारोपण के पीछे पड़े थे।             

गलत है अस्पताल का व्यवहार
वकील अशोक अग्रवाल का कहना है कि जहां दिल्ली सरकार गरीबों को उपचार देने में जोर दे रही है। वहीं, अस्पताल द्वारा यह व्यवहार दुर्भाग्यजनक है। सरकार को इस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। ताकि अस्पतालों में मरीजों के जान से खिलवाड़ बंद हो सके।             

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