पूर्वी दिल्ली में देर रात खाना के बाद अब्दुल मतलूब (55) का परिवार हंसी-मजाक के बीच अपने-अपने फ्लोर पर सोने चला गया। किसी को अंदाजा नहीं था कि मौत दस्तक देने वाली है और अगली मनहूस सुबह उनके परिवार के छह सदस्यों को छीन लेगी। हादसे में घायल परवेज ने बताया कि देर रात सोने के कारण सुबह के समय सभी गहरी नींद में थे। तभी अचानक तेज कंपन हुई। चौथी मंजिल पर सो रहे परवेज को लगा कि भूकंप आया है। उसकी आंख खुली ही थी कि मकान तेज आवाज के साथ ढह गया।
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दिल्ली में मकान गिरा
- फोटो : एएनआई
मलबे में आधा दबे परवेज को लगा कि अब जान नहीं बचेगी, लेकिन पड़ोसी और उसके दोस्त रिजवान ने उसे आवाज देकर मलबे से खींचना शुरू किया। उस पल लगा कि अभी जान बाकी है। कुछ ही देर में परवेज को मलबे से निकाल लिया गया। उसके सिर से खून बह रहा था।
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दिल्ली में मकान गिरा
- फोटो : एएनआई
मलबे में दबी पत्नी शीजा, बेटा अहमद और भाई नावेद दिखे
लहूलुहान हालत में बदहवास होकर उसने अपनी पत्नी, बच्चे और बाकी लोगों के बारे में पूछा। तभी उसे मलबे में दबी पत्नी शीजा, बेटा अहमद और भाई नावेद नजर आए। अपनी चोट की परवाह किए बिना परवेज तीनों को बचाने में जुट गया। अहमद अचेत था, जिससे परवेज डर गया, फिर उसने बेटे के सीने पर सिर रखकर उसकी धड़कन सुनी तो जान में जान आई।
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दिल्ली में मकान गिरा, अब्दुल मतलूब का फाइल फोटो
- फोटो : एएनआई/अमर उजाला
अहमद को छोड़कर सभी की हालत स्थिर
बाकी पड़ोसी भी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। परवेज, शीजा, अहमद और नावेद को अस्पताल भेजा गया। अहमद को छोड़कर सभी की हालत स्थिर है। अहमद वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। अब्दुल मतलूब के भतीजे सरफराज ने बताया कि उनके चाचा का आनंद विहार के सी-ब्लॉक में ड्राइक्लीन का काम है।
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दिल्ली में हादसे के बाद मौके पर जमा लोग
- फोटो : पीटीआई
परवेज, जावेद और नावेद उनके साथ काम करते थे। मकान की पहली मंजिल पर उनके चाचा मतलूब, चाची राबिया, भाई अब्दुल्ला और जावेद रहते थे। दूसरी मंजिल पर शादीशुदा बहन जूबिया और उसकी बेटी फौजिया तथा नावेद रहते थे।