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Delhi Election 2020: क्या ध्रुवीकरण की वजह से कांग्रेस पर मंडराने लगा सूपड़ा साफ होने का खतरा   

Wed, 05 Feb 2020 07:02 PM IST
Mohit Mudgal चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Wed, 05 Feb 2020 07:02 PM IST
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Delhi assembly Election 2020 congress losing election because of polarization 
दिल्ली विधानसभा चुनाव : 2020 - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली चुनाव प्रचार अपने आखिरी चरण में है। जहां भाजपा और आम आदमी पार्टी लगातार एक-दूसरे पर हमलावर हैं वहीं कांग्रेस इस दौड़ में पिछड़ती नजर आ रही है। पांच वर्ष पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक भी सीट पर जीत हासिल न कर पाने वाली कांग्रेस के सामने एक बार फिर खराब प्रदर्शन का खतरा मंडरा रहा है। प्रदेश कांग्रेस के नेता आपसी बातचीत में मान रहे हैं कि विधानसभा की 70 सीटों में इस बार कुछ एक को छोड़ लगभग सभी जगह आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले वह मुकाबले में ही नहीं है। 

Delhi assembly Election 2020 congress losing election because of polarization 
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020ः कांग्रेस ने जारी किया मेनिफेस्टो - फोटो : ANI

विधानसभा चुनावों की रणनीति व प्रबंधन से जुड़े प्रदेश कांग्रेस के एक नेता का कहना था कि एक समय दिल्ली में सबसे मजबूत राजनीतिक दल के तौर पर स्थापित और लगातार 15 वर्षों तक शासन कर चुकी कांग्रेस मुश्किल से पांच या छह विधानसभा क्षेत्रों में ही ठीक से चुनाव लड़ रही है।

सूत्रों के मुताबिक जिन सीटों पर कांग्रेस की मौजूदगी दिख रही है उनमें ओखला, बल्लीमारान, सीलमपुर और मुस्तफाबाद की सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। इनके अलावा पार्टी गांधीनगर और बादली जैसे क्षेत्रों में भी खुद को लड़ाई में मान रही है।

Delhi assembly Election 2020 congress losing election because of polarization 
कांग्रेस - फोटो : social media

ओखला इलाके में सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद अहमद ने कहा कि कुछ हफ्ते पहले तक यहां कांग्रेस की स्थिति मजबूत थी, लेकिन अब यहां के लोगों में यह माहौल बनता दिख रहा है कि वो भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा नहीं करेंगे। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के लिए यहां से जीतना काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

ओखला से कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद परवेज हाशमी को उम्मीदवार बनाया है। प्रदेश में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ धरना प्रर्दशन का केंद्र बना शाहीन बाग इसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

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कांग्रेस - फोटो : social media

इसी तरह, सीलमपुर विधानसभा सीट पर भी पांच बार के विधायक रहे मतीन अहमद की उम्मीदवारी के मद्देनजर खुद को मजबूत मानकर चल रही कांग्रेस के लिए मतदान से कुछ दिनों पहले तक हालात मुश्किल नजर आ रहे हैं।

सीलमपुर निवासी मोहम्मद सलीम ने बताया कि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार बदलने और भाजपा विरोधी मतों के बंटवारे के डर से कांग्रेस लिए लड़ाई कठिन हो गई है। हालांकि, सलीम का कहना था कि पूरी तस्वीर मतदान से एक-दो दिन पहले ही साफ होगी। सीएसडीएस के निदेशक और राजनीतिक विशेषज्ञ संजय कुमार का मानना है कि कांग्रेस दिल्ली की लड़ाई से बाहर हो चुकी है।

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Rahul Gandhi

पार्टी के रणनीतिकार आम आदमी पार्टी के साथ किसी तरह की रणनीतिक समझ से इनकार कर रहे हैं पर संभवत यही कारण है कि अब तक कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली में चुनावी सभा से परहेज किया है और तीनों शायद मतदान के ठीक पहले ही प्रचार में उतरेंगे।

वैसे, पार्टी के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको का दावा है कि पार्टी चौंकाने वाले नतीजे देगी और चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में सभी शीर्ष नेता जनता के बीच होंगे।

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