बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का कहना है कि समाज में अभी भी मानसिक बीमारियों पर भ्रांतियों का दबदबा है। शुक्रवार को राजधानी के एक होटल में दीपिका ने अपने द लिव लव लॉफ फाउंडेशन की एक रिपोर्ट भी जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन गलत धारणाओं को दूर करने संबंधी कार्यक्रम चलाने की जरूरत है।
दीपिका पादुकोण ने जारी की ये रिपोर्ट, बताया 'मानसिक रोग' के बारे में
87 प्रतिशत लोग मानसिक रोग को गंभीर विकारों और उनके लक्षणों से जोड़ते हैं। देश के आठ शहरों में यह सर्वे किया गया। जिसमें 3500 से अधिक लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव (स्वास्थ्य) संजीव कुमार भी मौजूद थे।
इस दौरान दीपिका पादुकोण ने कहा, हम देश में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बेहतर समझदारी विकसित करने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। रिसर्च बताती है कि उत्तर दाताओं में से एक चौथाई ही मदद को तैयार रहते हैं, जबकि बाकी मानसिक रोगियों के बारे में कुछ भी धारणा बना लेते हैं या फिर उनसे डरते हैं। फाउंडेशन की अध्यक्षा ऐना चैंडी ने कहा कि बड़े शहरों में अधिक जानकारी और रोजगार संबंधी अवसरों के कारण अधिक से अधिक लोग व परिवार अकेले हैं। हालांकि, कानपुर और पटना जैसे शहरों में उनकी सामूहिक जड़ें कायम हैं। वहां एकल परिवारों का चलन कम है।
यह भी हुआ खुलासा
वहीं, रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 47 प्रतिशत लोगों के मन में मानसिक रोग वाले व्यक्तियों के प्रति एक लांछन की भावना बैठी है। वे इन्हें मंदबुद्धि समझते हैं। इतना ही नहीं, 60 प्रतिशत लोगों का मानना है कि मानसिक रोग वाले लोगों को ग्रुप बनाने चाहिए ताकि स्वस्थ लोग प्रभावित न हो सकें। वहीं, 68 प्रतिशत का मानना है कि ऐसे लोगों को किसी भी तरह की जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। जबकि 60 प्रतिशत लोगों का मानना है कि मानसिक रोग की असली वजह है आत्म अनुशासन और इच्छाशक्ति की कमी है।
रिपोर्ट की विशेषताएं
लगभग 2 में 1 व्यक्ति मानता है कि स्वस्थ होने का मतलब हैं’खुश रहना।
2 में से 1 व्यक्ति मानता है कि स्वस्थ होने का अर्थ है स्वस्थ मस्तिष्क।
50 फीसदी प्रतिभागियों ने मानसिक रोगियों के लिए मंदबुद्धि शब्द का प्रयोग किया।
92 प्रतिशत का मानना है कि ऐसे लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलना चाहिए।
10 में से 6 व्यक्तियों का मानना है कि मानसिक बीमारी आत्म अनुशासन और इच्छाशक्ति की कमी के कारण होती है।