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14 हत्याएं करने वाले साइको किलर से दहली थी दिल्ली, ऐसे लगा था पुलिस के हाथ

Wed, 03 Jan 2018 10:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 03 Jan 2018 10:28 AM IST
सार

पलवल की तरह दिल्ली में भी साईको 10 वर्ष पहले दे चुका है घटनाओं को अंजाम
हत्या के बाद शव से हाथ पैर, सिर को अलग कर देता था ताकि मृतक की पहचान न हो
सीरियल किलर चंद्रकांत झा को मिला था मृत्युदंड

psycho killer was killed fourteen people in delhi got life imprisonment
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा के पलवल में एक ही रात छह लोगों की हत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। आरोपी साईको बताया जा रहा है। यह पहला मामला नहीं है इससे पहले वर्ष 2007 में दिल्ली में भी ऐसे ही एक व्यक्ति ने एक के बाद एक हत्याएं कर राजधानी में सनसनी फैला दी थी। हालांकि उस पर निर्दोष लोगों की हत्याओं के 14 मामले दर्ज किए गए थे, मगर तीन में उसे फांसी की सजा मिली थी। आरोपी चंद्रकांत झा ने जिन लोगों की हत्याएं की थी उनसे उसकी कोई दुश्मनी नहीं थी।
psycho killer was killed fourteen people in delhi got life imprisonment
- फोटो : अमर उजाला

सनसनी बन गया था चंद्रकांत
राजधानी में सीरियल किलर मधेपुरा बिहार निवासी चंद्रकांत झा ने 2006 व 2007 में सिरकटे शव यहां वहां फेंक कर सनसनी फैला दी थी। चंद्रकांत ने सात लोगों की हत्या की थी। उसने हत्या करने के बाद शवों को अपने इंजन लगे रिक्शा में लादकर तिहाड़ जेल, तीस हजारी अदालत के अलावा कई स्थानों पर फेंका था।

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psycho killer

पुलिस को देता था चुनौती
हत्या करने के बाद चंद्रकांत शव के साथ चुनौती भरा पत्र भी देता था। वह पुलिस को खुद को पकड़ने की चुनौती देता था। एक शव के साथ रखे पत्र में उसने लिखा कि वह इस तरह के गिफ्ट हर 15 दिन के बाद भेजता रहेगा। उसने पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर व थानों में फोन करके खुद को पकड़ने की चुनौती दी। उसने पत्र में लिखा कि पुलिस ने उसे झूठे मामलों में फंसाया था, जिसका बदला वह हत्या करके ले रहा है। पुलिस ने हरी नगर, आदर्श नगर थानों में चंद्रकांत के खिलाफ 14 मामले दर्ज किए थे। यही कारण है कि पुलिस उसे एक साईको मानकर जांच में जुट गई थी।

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- फोटो : अमर उजाला

हत्या के बाद मिटाता था पहचान
हत्या के बाद शव से हाथ पैर, सिर को अलग कर देता था ताकि मृतक की पहचान न हो। इनमें से एक शव की पहचान ही नहीं हो सकी थी। पुलिस को तिहाड़ जेल के गेट नंबर तीन के सामने 24 व 25 अप्रैल 2007 की लावारिस हालत में एक बोरा पड़ा मिला। बैग की तलाशी लेने पर उसमें 28 साल के एक युवक का सिर कटा शव मिला। शव की पहचान छिपाने के लिए युवक का सिर अन्य स्थान पर फेंका गया। गेट नंबर तीन पर स्थित एटीएम के सुरक्षा गार्ड अखिलेश सिंह ने 25 अप्रैल 2007 की सुबह पुलिस को लावारिस बोरे की सूचना पुलिस को दी थी। मौके पर पुलिस ने पाया कि युवक का शव सफेद चादर में लपेटा गया था। शव का सिर, हाथ-पैर व उसका गुप्तांग गायब था। पुलिस ने उसे गुप्ता सूचना के आधार पर मियांवली इलाके से शिव मंदिर के नजदीक से गिरफ्तार किया था। अदालत ने भी उसके अपराध को दुर्लभतम मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा था कि चंद्रकांत झा ने जिन लोगों की हत्या की, वह सब निर्दोष थे। इतना ही नहीं उसने पुलिस व कानून व्यवस्था को एक बार नहीं बल्कि बार-बार चुनौती दी। उसके सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। उसने जिस तरह से निर्दोष लोगों की हत्याएं कीं, उसके मद्देनजर मृत्युदंड उसके लिए सही सजा है।

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