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एक साल बाद भी नहीं मिला बेटे का न्याय, मां ने दी आत्मदाह की धमकी
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एक वर्ष पहले आज ही के दिन भरी दोपहर में सरेआम होंडा एकार्ड कार सवार दो कातिलों ने सेक्टर-76 में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मेरठ निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकित चौहान की हत्या कर दी थी। नोएडा पुलिस ने हत्याकांड को जल्द सुलझने का दावा किया था। तत्कालीन आईजी आलोक शर्मा और एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने कातिलों को पकड़ने के लिए तेजतर्रार पुलिस अफसरों की टीम लगाई, जिसमें एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और थाना पुलिस के अधिकारी शामिल थे।
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पुलिस टीम ने कई एंगल पर जांच की, लेकिन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी। उस समय शहर की कमान संभालने वाले नए एसपी सिटी दिनेश यादव को 48 घंटे भी नहीं हुए थे कि अंकित हत्याकांड को सुलझाना उनके सामने बड़ी चुनौती बन गई। यहीं नहीं एक वर्ष के भीतर एसएसपी, डीएसपी, तीन थाना प्रभारी आदि बदल गए लेकिन हत्याकांड का खुलासा नहीं हो सका।
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केस की जांच में एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की टीम जुटी रहीं, लेकिन किसी के हाथ सुराग नहीं लगा। हालांकि जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया था उससे साफ जाहिर था कि पुलिस के पास खुलासा करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। इतना ही नहीं, मौके पर पहुंचे तत्कालीन एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने दावा किया था कि केस जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
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केस की जांच में तेजतर्रार डीएसपी राजकुमार मिश्रा भी लगाए गए, लेकिन उनके हाथ भी सुराग नहीं लगा। कुछ ही दिनों बाद डीएसपी राजकुमार मिश्र का ट्रांसफर एसटीएफ में हो गया। एसटीएफ ने भी मामले की जांच की और दो दर्जन से ज्यादा लोगों से पूछताछ की। सेक्टर-49 पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन किसी भी ठोस नतीजे पर पुलिस नहीं पहुंच सकी।
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यह था पूरा मामला : मूल रूप से मेरठ निवासी अंकित चौहान (27) पुत्र धर्मवीर चौहान सेक्टर-77 स्थित प्रतीक विस्टिरिया अपार्टमेंट में पत्नी अमीषा चौहान (मुजफ्फरनगर निवासी) के साथ रहता था। 13 अप्रैल 2015 को अंकित की छुट्टी थी। अमीषा सेक्टर-135 स्थित ऑफिस गई थी। दोपहर 2.30 बजे अंकित दोस्त गगन को लेकर अमीषा के पास लंच करने पहुंच गया। वहां से लंच कर दोनों फॉर्च्यूनर कार से लौट रहे थे। सेक्टर-135 पार करते ही अंकित ने बैक मिरर में देखा कि सफेद होंडा एकाडर् कार से उसका कोई पीछा कर रहा है। उसने यह बात गगन को भी बताई। कार अंकित ड्राइव कर रहा था और साइड की सीट पर गगन बैठा था।
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