शनिवार को रोजमर्रा के काम में जुटे लोगों के बुझे चेहरे और आंखों से छलकता दर्द रवि की मौत के पांचवें दिन भी बिसाहड़ा गांव में मातम की कहानी बयां कर रहा था। हालांकि, चार दिन से दिख रहा आक्रोश, शोर, लोगों की भीड़ और भारी पुलिस बल नदारद था, लेकिन एहतियातन कुछ पुलिसकर्मी तैनात थे।
बिसाहड़ा : लोगों के दिलों में दर्द बरकरार लेकिन जिंदगी पकड़ रही रफ्तार
वहीं, स्कूल से आते-जाते हंसते-खेलते बच्चे, गली-गली में खुली छोटी-मोटी दुकानें व काम के लिए निकले लोग गांव में धीरे-धीरे जिंदगी के रफ्तार पकड़ने की गवाही दे रहे थे। शुक्रवार को रवि के दाह संस्कार के बाद शनिवार को अमर उजाला संवाददाता जेपी शर्मा और फोटोग्राफर हिमांशु सोनी ने बिसाहड़ा गांव के हालात का जायजा लिया।
समय- सुबह 11 बजे
स्थान - बिसाहड़ा गांव का मुख्य द्वार
मंगलवार रात को रवि की मौत की खबर के बाद से यहां भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी भी यहां डेरा डाले हुए थे। शनिवार को यहां हालात बदले हुए थे। पुलिसकर्मियों के लिए कुर्सियां तो पड़ी थीं, लेकिन इक्का-दुक्का पुलिसकर्मी ही खड़ा था। पास में ही पड़ा एक खोखा भी खुला हुआ था और उस पर वृद्ध बैठा हुआ था।
समय - दोपहर 1:05 बजे
स्थान - गांव का मुख्य मार्ग
स्कूल के अवकाश के बाद बड़ी संख्या में बच्चे पीठ पर बैग लादे घरों को लौट रहे थे। हंसते-खेलते बच्चे रास्ते में रुककर एक दूसरे से बात करते, गांव से गुजरती पुलिस की गाड़ी को देखते और फिर आगे बढ़ जाते। खेतों में भी लोग काम करते नजर आए। गांव निवासी लोकेश शर्मा ने बताया कि वह हरिद्वार में निजी कंपनी में काम करते हैं। घटना की खबर सुनकर वह गांव आ गए थे, अब वह वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं।
दोपहर - दोपहर 1:25 बजे
स्थान - रवि के घर के सामने
रवि के घर के सामने जहां उसकी मौत के बाद से धरना चल रहा था और शुक्रवार को महापंचायत हुई थी। वहां परिवार की महिलाएं व भाई लोकेश बैठा हुआ था।