सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। इसका सीधा असर फुटकर व थोक पटाखा व्यापारियों पर पड़ा है। दिवाली के मद्देनजर इन लोगों ने पटाखे बुक कर लिए थे। कुछ व्यापारी तो पूरा पैसा भी कंपनियों को दे चुके हैं। लाइसेंस मिलते ही गोदाम से माल इनकी दुकानों पर पहुंचना था। लेकिन अदालत के फैसले ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है।
SC के आदेश से दिवाली के पटाखे फुस्स, व्यापारियों का निकला दिवाला
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व्यापारी इस फैसले से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। वह भूख-हड़ताल व प्रदर्शन कर पटाखा बिक्री पर लगी रोक को हटाने की मांग रहे हैं। सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर व्यापारियों ने प्रदर्शन कर पटाखे बेचने पर रोक को हटवाने की मांग की।
धनतेरस से नोएडा सेक्टर-33 स्थित मैदान व ग्रेटर नोएडा में सेक्टर-36 रामलीला मैदान में पटाखे की दुकानें लगती हैं। इसके लिए लाइसेंस प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। करीब 1900 लाइसेंस के लिए आवेदन किया जा चुका था। चालान से लेकर पुलिस वेरीफिकेशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
मंगलवार से लाइसेंस भी मिलने वाले थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद अब इस प्रक्रिया को रोक दिया गया है। सोमवार को व्यापारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट ऑफिस पर लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले व्यापारियों ने मांग की कि पटाखों को बेचने दिया जाए। उन्होंने आतिशबाजी में रुपये लगा दिए हैं और इसका लाइसेंस न मिलने से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान होगा।
जिले में करोड़ों का होता है कारोबार
किस व्यापारी को कितना पटाखा लेना होता है, ज्यादातर व्यापारियों ने आर्डर दे दिए थे। उसके लिए एडवांस में भी जमा कर दिया था। चूंकि एडवांस का दिया पैसा तो वापस नहीं होगा। थोक में पटाखा बेचने वाले व्यापारियों ने साफ कह दिया है कि वह तो माल बना चुके हैं। फैक्टरी मालिकों को भी भारी नुकसान हुआ है। हालांकि कई व्यापारी तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने अधिकतर माल खरीदकर रख लिया था और लाइसेंस के लिए भी आवेदन कर दिया था। यही हाल अन्य पटाखा व्यापारियों का भी है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करीब 180 दुकानें लगाई जाती हैं। दुकानों पर 2 से 5 लाख का माल रहता था। इसी तरह फुटकर व्यापारी दादरी, जेवर, रबूपुरा, भंगेल, सलारपुर और बिलासपुर आदि जगहों पर पटाखा की दुकानें लगाते हैं।