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CourageInkargil: 19 गोलियां खाकर किया मरने का नाटक, ग्रेनेड फेंककर उड़ाई दुश्मनों की धज्जियां, फिर टाइगर हिल पर लहराया तिरंगा

Sun, 26 Jul 2020 01:24 PM IST
प्राची प्रियम अंकुश बिश्नोई, साहिबाबाद
अंकुश बिश्नोई, साहिबाबाद Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 26 Jul 2020 01:24 PM IST
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CourageInKargil Story of Paramveer Yogendra Singh yadav who fought to win Tiger Hill
परमवीर चक्र से सम्मानित योगेंद्र सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
एक ऐसा योद्धा जिसने कारगिल युद्ध के दौरान बहादुरी की मिसाल पेश की। दुश्मन की 19 गोलियां खाईं लेकिन हार नहीं मानी। पहले दुश्मन के सामने मरने का नाटक कर जमीन पर पड़ा रहा और मौका मिलते ही ग्रेनेड से हमला किया और फिर गोलियां बरसा कर पाकिस्तान की पूरी टुकड़ी को नेस्तनाबूद कर दिया। 


 
CourageInKargil Story of Paramveer Yogendra Singh yadav who fought to win Tiger Hill
Yogendra singh yadav - फोटो : अमर उजाला
19 साल की उम्र में कारगिल युद्ध के दौरान अनुकरणीय युद्ध कौशल का प्रदर्शन करने वाले परमवीर चक्र से सम्मानित योगेंद्र सिह यादव आज भी उन पलों को याद करते हैं। उनका कहना है कि वह एक रात की लड़ाई युद्ध के सभी मापदंडों पर हमारी टुकड़ी ने लड़ी, जिसमें बहादुरी के साथ ही रणनीति और युद्ध जीतने के लिए हर सैनिक ने सर्वोच्च प्रदर्शन किया। इसी का नतीजा था कि उस रात की लड़ाई के बाद टाइगर हिल पर भारतीय सेना कब्जा जमा पाई।   

 
CourageInKargil Story of Paramveer Yogendra Singh yadav who fought to win Tiger Hill
Yogendra singh yadav - फोटो : अमर उजाला
लाजपत नगर निवासी परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव आज भी उस रात को नहीं भूल पाए हैं, जब उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपनी आंखों के सामने एक-एक कर अपने साथियों को खोया था। मूल रूप से बुलंदशहर के औरांगाबाद अहिर गांव निवासी योगेंद्र ने कारगिल युद्ध में अपनी जान की बाजी लगाकर दुश्मनों और उनके ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था। वह बताते हैं कि उस रात को कभी नहीं भूलते, जब उनकी बटालियन को टाइगर हिल टॉप को अपने कब्जे में लेने के निर्देश मिले थे। वह साथियों के साथ दो और तीन जुलाई 1999 की रात में सफर कर ऊपर पहुंचने ही वाले थे कि दुश्मनों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें कई साथी बहादुरी से लड़ते हुए शहीद हो गए लेकिन योगेंद्र अपने कुछ साथियों के साथ ऊपर तक पहुंच गए। जहां पर पाकिस्तानी सेना के बंकर बने थे। 

 
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CourageInKargil Story of Paramveer Yogendra Singh yadav who fought to win Tiger Hill
Yogendra singh yadav - फोटो : अमर उजाला
यहां पर उनकी टुकड़ी और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच करीब पांच घंटे तक लगातार फायरिंग हुई। योगेंद्र बताते हैं कि पांच घंटे तक दोनों ओर से फायरिंग के बाद हमने रणनीति बदली। अचानक से हम सभी साथियों ने फायरिंग बंद कर दी और सभी पत्थरों के पीछे पोजिशन लेकर बैठ गए। इससे दुश्मन को लगा कि हमारा गोला-बारूद खत्म हो गया या फिर हमारी टुकड़ी नहीं बची है। सुबह करीब 11 बजे जब पाकिस्तानी सैनिक हमें देखने आए तो हम पूरी तरह अलर्ट थे। 

 
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CourageInKargil Story of Paramveer Yogendra Singh yadav who fought to win Tiger Hill
Yogendra singh yadav - फोटो : अमर उजाला
इस बार हमारी टुकड़ी ने पूरी क्षमता के साथ दुश्मन पर हमला किया, जिससे उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला। इसमें दुश्मन के सभी सैनिक मारे गए और कुछ बचे तो वह भाग गए। करीब पौन घंटे बाद 35-40 पाकिस्तानी सैनिकों की टुकड़ी ने वहां आकर फिर से हमला किया। इस दौरान आंखों के सामने दो साथी वीरगति को प्राप्त हो गए। अब युद्ध के मैदान में वह अकेले बचे थे। 

 
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