दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा एलान किया है, जिसके तहत अगर सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले कुछ महीनों में दिल्ली की महिलाएं डीटीसी बस, क्लस्टर बस और दिल्ली मेट्रो में मुफ्त में यात्राएं कर सकेंगी। यह योजना भले ही कितनी भी लुभावनी हो लेकिन इसे लागू करने में दिल्ली सरकार को कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। इस योजना को कार्यांवित करने में सरकार को कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ेगा। आगे पढ़िए कौन से हैं वो पेंच जिनसे ये योजना मुश्किल में पड़ सकती है।
दिल्ली में महिलाओं के लिए कैसे मुफ्त होगा बसों और मेट्रो का सफर, उठ रहे ये 5 सवाल
एनसीआर की महिलाओं को भी होगा लाभ?
भले ही दिल्ली सरकार ये योजना अगले साल होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ला रही है लेकिन उसके लिए ये मुसीबत है कि वह उन महिलाओं को इस योजना में शामिल करे कि नहीं जो दिल्ली में वोटर नहीं हैं। यानी एनसीआर की वो महिलाएं जो दिल्ली की मतदाता नहीं हैं क्या उन्हें इस योजना में जगह मिलेगी। क्या नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद से दिल्ली के लिए यात्रा करने वाली महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा? सबके मन में यही सवाल है कि क्या यह महिलाएं मुफ्त यात्रा कर सकेंगी? इस पर केजरीवाल से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि एनसीआर की महिलाओं को इसमें शामिल किया जाए या नहीं इस बारे में विचार चल रहा है।
केंद्र सरकार देगी मंजूरी?
जैसा कि सभी जानते हैं कि दिल्ली सरकार को अपनी हर योजना लागू करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या केंद्र इस योजना को मंजूरी देगी? हालांकि जब यह सवाल केजरीवाल से पूछा गया तो वह बोले कि हम इस योजना के लिए सब्सिडी दे रहे हैं ऐसे में केंद्र की रजामंदी का सवाल नहीं उठता।
लेकिन अगर केंद्र सब्सिडी में हिस्सा देती है तो वह कितना देगी, देगी या नहीं देगी।
चेहरा देखकर होगी फ्री यात्रा या लाइन में लगकर बनवाना होगा पास?
लोगों के मन में इस योजना को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं उनमें प्रमुख ये है कि महिलाओं को इस योजना का लाभ कैसे मिलेगा। क्या महिलाओं का चेहरा देखकर उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाएगा या फिर कोई पास या फोटो पहचान पत्र जारी होगा?
कहीं डीटीसी जैसी न हो जाए मेट्रो?
लोगों के मन में ये आशंका है कि दिल्ली में 33 फीसदी महिलाएं बसों व मेट्रो में सफर करती हैं। ऐसे में कहीं दिल्ली मेट्रो डीटीसी की तरह न हो जाए। यानी कहीं जिस तरह डीटीसी घाटे में चल रही है उस तरह महिलाओं के फ्री में यात्रा करने से कहीं दिल्ली मेट्रो भी घाटे में न आ जाए।