मेट्रो किराया बढ़ोत्तरी को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार फिर भिड़ गए हैं। इस बार यह जंग ट्विटर पर शुरू हुई है। सबसे पहले केंद्रीय शहरी विकास मंत्री ने लगातार कई ट्वीट करके कहा कि मेट्रो किराया बढ़ने से लोग महंगी कारों और कैब की सेवाएं ले रहे हैं, इस तरह का बयान बेतुका है। यह गलत तरीके से इसे परिभाषित करना है।
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hardeep singh puri
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हरदीप पुरी का यह बयान बीते दिनों केजरीवाल की उस चिट्ठी का जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने मेट्रो किराया बढ़ोत्तरी की समीक्षा करने के साथ उसे वापस लेने की मांग की थी। उसमें उन्होंने यह भी लिखा था कि मेट्रो किराया बढ़ने से लोग दूसरे विकल्पों की तरफ जा रहे हैं।
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hardeep singh puri
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उन्होंने मेट्रो किराया बढ़ोतरी वापस लेने पर होने वाले घाटे के आधा हिस्से की भरपाई का ऑफर भी दिया था। हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट में उस चिट्ठी का तो जिक्र नहीं किया, लेकिन लिखा कि लोग दुनिया की सबसे सस्ती मेट्रो से सफर नहीं कर पा रहे हैं तो क्या वास्तव में वह महंगी कारों और कैब का प्रयोग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह गलत बयानबाजी है। वह यहीं नहीं रुके और दिल्ली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मेट्रो इतनी महंगी लग रही है तो राज्य सरकार को तुरंत डीटीसी बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। बसों की संख्या कम होने से डीटीसी की बसों में 35 फीसदी यात्री घट गए हैं। दिल्ली में अब भी 7000 बसें कम हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? दिल्ली वालों को दोनों की जरूरत है। अच्छी बहस के लिए जरूरी है कि डीटीसी को बेहतर बनाएं।
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kailash gahlot
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हरदीप सिंह पुरी के लगातार किए गए ट्वीट और दिल्ली सरकार पर हमले के बाद दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने ट्विटर पर मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने लिखा कि सर आप ठीक कह रहे हैं। दिल्ली को डीटीसी और मेट्रो दोनों की जरूरत है। हम डीटीसी के लिए बसें खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। हम दिल्लीवालों के लिए मेट्रो का सस्ता सफर करने के लिए बढ़ोतरी वापस लेने से होने वाले घाटे का आधा हिस्सा देने को तैयार हैं। कृपया आप हमारा ऑफर स्वीकार करें। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने परिवहन मंत्री के इस ट्वीट को रिट्वीट कर समर्थन किया।