दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 परिजनों के फांसी पर झूल जाने की गुत्थी एक तरफ तो देश-विदेश में सुर्खियां बनी हुई है। वहीं दूसरी तरफ मृतक परिवार के ही अन्य सदस्य तंत्र-मंत्र जैसे कयासों को न सिर्फ खारिज कर रहे हैं बल्कि इसे लांछन मानकर सदमे में भी है। राजस्थान में रहने वाली मृतक ललित के बड़े भाई की बेटी विशाखा चंडावत ने ऐसे ही तमाम कयासों को खारिज कर पूरा किस्सा बयां किया है जो मृतक परिजनों की हालिया जिंदगी की कहानी का एक दूसरा ही पक्ष बयां करती है -
बुराड़ी में मरने वाला परिवार 'भाटिया' नहीं 'चंडावत' था, ललित की भतीजी ने बताई कई अनसुनी बातें
भाटिया नहीं सिंह चंडावत था सरनेम विशाखा सिंह चंडावत का कहना है कि मेरे चाचा का नाम ललित भाटिया नहीं ललित सिंह चंडावत था। परिवार में सिर्फ मेरी चचेरी बहन प्रियंका और चाची प्रतिभा अपने नाम के आगे भाटिया लगाते थे। बाकी हम सभी लोग अपने नाम के आगे सिंह चंडावत सरनेम का इस्तेमाल करते हैं। विशाखा ने कहा कि मेरे चाचा का पूरा परिवार किसी तरह के तंत्र-मत्र जैसे अभ्यास नहीं करता था। पूरा परिवार सामान्य था और अंधविश्वास जैसी कोई चीज नहीं थी।
हम तो सजने की तैयारियों में थे, कभी नहीं देखा मोक्ष वाला रजिस्टर हम प्रियंका दीदी (मृतका) की शादी को लेकर बहुत ही खुश और उत्साहित थे। आखिर यह हमारे घर में भाई-बहनों के बीच पहली शादी जो थी। प्रियंका दीदी के अलावा सभी भाई-बहनों का एक व्हाट्स ऐप ग्रुप भी बनाया गया था। इस ग्रुप पर हम दीदी से काफी बातें करते थे। शादी की तैयारियों और सजने-धजने को लेकर हमारे बीच बातें होती थीं। जिस मोक्ष वाले रजिस्टर की कहानी को लेकर तमाशा बनाया जा रहा है वह हमारे बीच चर्चा में कभी नहीं आया। मैं जानती हूं घर में सिर्फ हनुमान चालीसा और भगवतगीता मौजूद थी। मैंने कोई मोक्ष वाला रजिस्टर कभी नहीं देखा।
मनोवैज्ञानिक रोग से ग्रस्त नहीं थे मेरे चाचा विशाखा ने कहा कि हमें अपने परिवार के लिए शोक का भी मौका नहीं मिल रहा। मेरे चाचा ललित किसी भी तरह से मनोवैज्ञानिक बीमारी से ग्रस्त नहीं थे। वह पूरी तरह सामान्य थे। मृतक पिता की आत्मा से चाचा की बातचीत का कयास बिल्कुल ही गलत है। मैं और मेरा भाई अक्सर अपनी दादी नारायण देवी के यहां जाया करते थे। मैंने कभी अपने चाचा (ललित) को ऐसा करते नहीं देखा। अगर ऐसा था तो कम से कम एक बार तो हम लोगों ने देखा होता। 16 जून को हमने प्रियंका दीदी के इगेंजमेंट से पहले खूब डांस भी किया था। मैं दो वर्ष बाद बुराड़ी आई थी। यहां हम 11 से 19 जून तक रुके और मंदिर भी गए।
स्टूल खरीदने की वजह ट्यूशन के बच्चे भी हो सकते हैं सीसीटीवी फुटेज में परिवार के सदस्य के स्टूल खरीद कर ले जाने के पीछे की वजह भी प्रियंका चंडावत ने कुछ और ही बताई। प्रियंका ने कहा कि मेरी चाची बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थीं। हो सकता है यह स्टूल बच्चों के बैठने की व्यवस्था के लिए हो। सभी कहते हैं कि मेरा परिवार तब आध्यात्मिक हो गया जब ललित चाचा की आवाज वापस आ गई। यह बात भी झूठ है।