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बुलंदशहर हिंसाः इंस्पेक्टर हत्याकांड में आखिर क्यों उछला फौजी का नाम, क्या कहती है पुलिस की जांच

Fri, 07 Dec 2018 12:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुलंदशहर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Fri, 07 Dec 2018 12:15 PM IST
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bulandshahr violence: why sit and stf names army man jeetu fauji behind inspector subodh murder
bulandshahr violence - फोटो : अमर उजाला

3 दिसंबर के दिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोकशी की अफवाह के बाद हुई हिंसा में स्याना कोतवाली प्रभारी सुबोध कुमार समेत सुमित नाम के युवक की मौत हो गई थी। इस मामले में अब तक ये नहीं पता चल पाया था कि आखिर इंस्पेक्टर सुबोध और सुमित को गोली किसने मारी। लेकिन अब इस मामले में एसआईटी और एसटीएफ की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस खुलासे के मुताबिक इंस्पेक्टर सुबोध को मारने में एक फौजी का नाम उछला है। बवाल में शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को जम्मू में तैनात एक फौजी ने गोली मारी थी। हमारी इस स्टोरी में पढ़ें कि जम्मू में तैनात एक फौजी का नाम इस मामले में क्यों सामने आ रहा है, इसकी क्या वजह है....

bulandshahr violence: why sit and stf names army man jeetu fauji behind inspector subodh murder
bulandshahr violence - फोटो : अमर उजाला

बुलंदशहर बवाल का मास्टरमाइंड कौन है, इसकी तफ्तीश कई सीनियर पुलिस अधिकारी कर रहे हैं। पुलिस ने पूरी घटना से संबंधित करीब 203 वीडियो जुटाई हैं, जिनमें यह देखा जा रहा कि बवाल कहां से शुरू हुआ और लोगों की भीड़ कैसे उत्तेजित हुई। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को किसने गोली मारी और उसका हत्यारोपी कौन है।

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दंगाइयों ने कोतवाल को घेरा - फोटो : अमर उजाला

यह भी जांच का विषय है कि स्थानीय युवक सुमित को किसकी गोली लगी। जांच अधिकारियों को इस प्रकरण में एक महत्वपूर्ण वीडियो मिला है, जिसमें एक व्यक्ति भीड़ में गोली चलाता दिखाई दे रहा है। जांच में यह व्यक्ति फौजी बताया गया, जो कि जम्मू में तैनात है। पुलिस दावा कर रही है कि इसी फौजी की गोली ही इंस्पेक्टर सुबोध को लगी। वीडियो में फौजी की पहचान करने के बाद पुलिस ने बुलंदशहर में उसके घर पर दबिश दी। फौजी घर पर नहीं मिला। जानकारी मिली कि फौजी छुट्टी पर आया था। लेकिन बवाल होने के बाद वह वापस चला गया।

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आवारा सांड को मारने की कोशिश के बाद मौके पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला

घटना साजिश का हिस्सा, विस्तृत जांच की जरूरत
बुलंदशहर की जांच रिपोर्ट के अनुसार एक ओर विशेष समुदाय के लाखों लोगों का मजमा था तो दूसरी ओर हाइवे पर गोकशी को लेकर हंगामा। इन दोनों को एक-दूसरे से जोड़ने की काफी कोशिश की गई। अगर साजिश कामयाब होती तो कई जिलों में स्थिति बेकाबू हो सकती थी। एडीजी ने इसका इशारा करते हुए घटना को साजिश का हिस्सा बताया है और विस्तृत जांच की जरूरत बताई। एडीजी ने अपनी रिपोर्ट स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासनिक अफसरों एसडीएम, तहसीलदार और सीओ के बयान के आधार पर तैयार की है।

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दंगाइयों ने कोतवाल को घेरा - फोटो : अमर उजाला

नहीं बनने दी संप्रदायिक दंगे की स्थिति
बवाल के दौरान कई बार सांप्रदायिक दंगे की अफवाह भी उड़ी, लेकिन डीएम अनुज कुमार झा आगे आकर सांप्रदायिकता की बात को खारिज करते हुए इसे कानून-व्यवस्था का मामला बताते रहे। सोशल मीडिया पर भी अपील करते रहे और स्थिति को काफी हद तक बिगड़ने से बचा लिया। अनुज के मुताबिक यदि उस समय यह अफवाह फैल जाती तो स्थिति को संभालना बहुत मुश्किल होता। जिन-जिन जिलों में इज्तेमा की गाड़ियां जाती वहां उन पर हमले हो सकते थे, जिसे जल्द नियंत्रित करना मुश्किल होता।

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