उत्तरी पूर्वी जिले के भजनपुरा स्थित जिस कोचिंग सेंटर की छत गिरने से पांच लोगों की जान गई, उसे देखने का जिम्मा नगर निगम के पास था। उसी के पास इमारतों में अवैध निर्माण रोकने का काम है। आसपास रहने वाले लोगों ने इस हादसे के लिए निगम की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। वैसे भी यह हादसा पहला नहीं है। पहले भी दिल्ली में अवैध निर्माण के कारण हादसे होते रहे हैं। इस मामले में पूर्वी दिल्ली नगर निगम के अधिकारी बात करने से भी बच रहे हैं।
2 of 5
भजनपुरा हादसा
- फोटो : अमर उजाला
भजनपुरा के सुभाष मुहल्ला की इस इमारत का नक्शा निगम से पास नहीं था। इमारत के भूतल और प्रथम पर लिंटर हैं। प्रथम तल के लिंटर पर गार्डर-पटिया से दूसरा फ्लोर बनाया गया था। इस पर भी निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की तो अब गार्डर पटियों के ऊपर ही एक और तल चढ़ाने का काम चल रहा था। इस पर भी गार्डर-पटिया ही डालने की योजना थी। तीसरी मंजिल पर निर्माण के दौरान अचानक दीवार ढही। दूसरी मंजिल की गार्डर-पटिया की छत इसका झटका नहीं सह पाई और भरभराकर गिर गई। इससे दूसरी मंजिल पर कोचिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे बच्चे हादसे के शिकार हो गए।
3 of 5
भजनपुरा हादसा
- फोटो : अमर उजाला
भजनपुरा के स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिल्ली में निगम की सांठगांठ के चलते जगह-जगह अवैध निर्माण हो रहे हैं। इनके कारण हादसों में अक्सर लोगों की जानें जाती हैं, लेकिन निगम इलाकों में कराए जा रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई में कोताही बरतता है।
4 of 5
घायल बच्चे को ले जाता युवक
- फोटो : अमर उजाला
इससे पहले, उत्तर पूर्वी जिले के सीलमपुर इलाके में दो सितंबर 2019 को चार मंजिला इमारत ढहने से दो लोगों की मौत हो गई थी और सात घायल हुए थे। यह इमारत बारिश के कारण कमजोर हो गई थी।
5 of 5
घायल बच्चे को ले जाता युवक
- फोटो : अमर उजाला
लोगों का आरोप था कि यह इमारत हिलती थी। इसे लेकर कई बार शिकायत भी की गई थी, लेकिन निगम अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी तरह उत्तरी दिल्ली निगम क्षेत्र में बीते 26 सितंबर को भारत नगर इलाके में चार मंजिला इमारत गिरने से दो महिलाओं और चार बच्चों की मौत हो गई थी और छह लोग घायल हुए थे।