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बिसाहड़ा: इस गांव में एक साल से न होली मनी न ईद, पसरी है सिर्फ वीरानी

Wed, 28 Sep 2016 01:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Wed, 28 Sep 2016 01:08 PM IST
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bisahada after one year of killing of iklakh
- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल 28 सितंबर को बिसाहड़ा गांव में गोवंश की हत्या के आरोप में पीट-पीटकर इकलाख की हत्या के बाद दो समुदायों के बीच पड़ी दरार अभी तक नहीं पट पाई है। घटना के बाद न तो इकलाख के परिवार समेत अन्य मुस्लिम परिवारों ने ठीक से ईद मनाई और न ही दिवाली और होली। गांव में एक तरफ जहां पीएसी ने डेरा डाल रखा है, वहीं, पूरा दिन वीरानी जैसी छायी रहती है।
bisahada after one year of killing of iklakh
- फोटो : अमर उजाला

एक वर्ष में हिंदू-मुस्लिम परिवारों का टूटा विश्वास जोड़ने के लिए समाजसेवियों व प्रशासन ने भरसक प्रयास किए। हिंदू समाज के लोगों ने चंदा एकत्र कर गरीब मुस्लिम परिवार के दो बेटियों की शादी भी कराई। प्रशासन की तरफ से आसपास के गांवों की कबड्डी टीमों के साथ सद्भावना प्रतियोगिता कराई। इसके बावजूद दोनों समुदाय के मन के तार नहीं जुड़ सके। हालांकि, दोनों समुदाय के लोग आपस में मिलकर रह रहे हैं। कोई किसी को परेशान नही कर रहा है। घटना के बाद से आज तक कोई विवाद भी नहीं हुआ है।

bisahada after one year of killing of iklakh
- फोटो : अमर उजाला

दूसरी ओर, एक साल से चल रही लंबी कानूनी प्रक्रिया ने आरोपियों के परिजन को तोड़ कर रख दिया है। वे आर्थिक रूप से दिन प्रति दिन कमजोर होते जा रहे हैं। जिस मंदिर से इकलाख के घर पर गोवंश काटने की सुचना प्रसारित हुई थी, वह मंदिर एक साल बाद भी सूना पड़ा है। पुजारी का कमरा बंद है। यहां तक कि मंदिर की साफ-सफाई भी गांव के श्रद्धालु कर रहे हैं। पीड़ित परिजन का कहना है कि इकलाख का परिवार वर्षों से गांव में रह रहा था। किसी से किसी प्रकार का कोई द्वेष नहीं था। जोश में युवकों द्वारा हादसा हो गया। गांव के लोग न्याय की लड़ाई आज भी लड़ रहे हैं। मथुरा की फोरेंसिक लैब से मांस के गोवंश के मांस की पुष्टि होने के बाद न्याय की लड़ाई आज भी जारी है।

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bisahada after one year of killing of iklakh
- फोटो : अमर उजाला

कर्ज में डूबे हैं आरोपियों के परिजन: एक साल से कानूनी लड़ाई लड़ने से परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। लोगों से कर्ज लेने पड़ रहे हैं। इकलाख की हत्या के बाद गांव के युवकों को बिना कोई विवेचना के पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जबकि दूसरी तरफ गोवंश काटने के आरोपी जान मोहम्मद की गिरफ्तारी नहीं हो रही है।- ओम महेश, आरोपी के  पिता  

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bisahada after one year of killing of iklakh
- फोटो : अमर उजाला

सरकार से न्याय की उम्मीद नहीं: प्रदेश सरकार की ओर से किया गया अन्याय हमलोग झेल रहे हैं। सरकार से न्याय मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। जान मोहम्मद की गिरफ्तारी भी सरकार के दबाव के कारण नहीं हो रही है। कहीं विवेचना के नाम पर सरकार सभी को क्लीन चिट ना दे दे।- ओमप्रकाश, आरोपी के पिता 

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