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एक किसान का बेटा कैसे बना खालिस्तान कमांडो फोर्स का भगोड़ा आतंकी बाबला, पढ़ें पूरा इतिहास

Thu, 14 Mar 2019 01:56 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 14 Mar 2019 01:56 PM IST
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bhinderwala associate khalistani terrorist babla history from farmer son to terrorist held in delhi
बाबला गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के भगोड़े आतंकी गुरसेवक उर्फ बाबला को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मंगलवार को इंटर बॉर्डर गैंगस्टर इंवेस्टिगेशन स्क्वायड के साथ मिलकर कश्मीरी गेट आईएसबीटी से बाबला को दबोचा। वह यहां किसी साथी से मिलने आया था। बाबला को ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान मारे गए जरनैल सिंह भिंडरावाला का बेहद करीबी माना जाता है। आगे पढ़िए एक किसान का बेटा कैसे बना भगोड़ा आतंकी, पूरी कहानी...
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babla arrest - फोटो : सोशल मीडिया

पंजाब के लुधियाना निवासी खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) का भगोड़ा आतंकी गुरसेवक उर्फ बाबला किसान परिवार में पैदा हुआ था। इसका बड़ा भाई स्वर्ण सिंह 1980 में पंजाब में चल रही आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया। स्वर्ण सिंह ने जरनैल सिंह भिंडरावाले का हाथ थाम लिया। भाई की देखादेखी बाबला भी 1982 में जरनैल सिंह के साथ मिल गया।

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babla arrest - फोटो : अमर उजाला

इस बीच 1984 में सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत जरनैल सिंह भिंडरावाले को मार गिराया। उसके काफी साथी पाकिस्तान भाग गए और वहां आईएसआई के साथ मिलकर भारत में आतंकी गतिविधियों में लिप्त हो गए। उस समय बाबला ने आतंकी मानवीर सिंह छेडू द्वारा बनाए गए नए आतंकी संगठन खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) का हाथ थाम लिया और आतंकी गतिविधियों में लिप्त हो गया।

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दिल्ली पुलिस के बैरियर्स

इन गतिविधियों में रहा शामिल
1984 में बाबला ने अपने साथियों लाभ सिंह, गुरिंदर सिंह, स्वर्ण जीत सिंह व अन्य के साथ मिलकर जालंधर में हिंद समाचार पत्र के संपादक रमेश चंद्र की हत्या कर दी थी। इसके बाद लुधियाना पुलिस ने कार्रवाई कर कई आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि कई को ऑपरेशन ब्लू स्टार में मार गिराया था। लुधियाना पुलिस ने 1984 में बाबला को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन जयपुर कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपी पंजाब पुलिस की कस्टडी से भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन से फरार हो गया। इसके बाद 1986 में जालंधर में पंजाब के पूर्व डीजीपी जूलिओ रिबेरियो के घर पर आतंकी हमला कर दिया था।

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संदिग्ध खालिस्तानी आतंकी गुरसेवक सिंह गिफ्तार - फोटो : अमर उजाला

आठ पुलिसकर्मियों की कर दी थी एक साथ हत्या
वर्ष 1986 में आरोपी गुरसेवक उर्फ बाबला ने अपने साथियों के साथ मिलकर केसीएफ चीफ जरनैल लाभ सिंह व आतंकी गुरिंदर पाल सिंह भोला को पुलिस कस्टडी से छुड़ाने के लिए जालंधर के कोर्ट परिसर में हमला कर दिया था। आरोपियों ने न सिर्फ दोनों को छुड़ा लिया, बल्कि हमले के दौरान पंजाब पुलिस के आठ जवानों की इन लोगों ने गोलीबारी के दौरान हत्या कर दी। इसके कुछ समय बाद ही 1986 में पंजाब पुलिस ने बाबला को दोबारा गिरफ्तार कर लिया। इससे पूर्व इन लोगों ने पंजाब के एक थाने पर धावा बोलकर वहां से 16 रायफल,6 कारबाइन, कारतूस, दो रिवॉल्वर, पुलिस जीप व एक कार लूट ली थी। वहीं गिरफ्तारी से पूर्व आरोपियों ने एक ही परिवार के नौ लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। गिरफ्तारी के बाद उसे 1986 में दिल्ली की तिहाड़ जेल में हाई रिस्क वार्ड में बंद कर दिया गया। 2004 तक वह 18 साल जेल में बंद रहा।

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