जंक फूड, तनाव, मोटापा, लंबे समय तक ड्राइव करने, पक्के फर्श पर चलने की मजबूरी युवाओं को रयूमेटायड आर्थराइटिस (आरए) का शिकार बना रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक पहले के लोग शारीरिक क्रियाएं बहुत ज्यादा करते थे लेकिन आज शारीरिक के बजाय मानसिक काम और तनाव ज्यादा होने से हड्डी के रोगों की बढ़ोतरी हो रही है।
आर्थराइटिस डे : इन कारणों से बढ़ रही बिमारी, 15 फीसदी मरीजों में 10 फीसदी युवा इसकी चपेट में
युवाओं में बढ़ रहे जंक फूड के फैशन ने उनकी हड्डियों खासकर उनके घुटनों व अन्य जोड़ों पर नकारात्मक प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। इसके कारण पहले बुजुर्गों में पाई जाने वाली बीमारी आर्थराइटिस अब युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है। बादशाह खान सिविल अस्पताल के फिजियोथेरिपस्ट डॉ. शैलेन्द्र अत्री ने बताया कि पिछले चार से पांच सालों में कुल मरीजों के 15 फीसदी मरीज आर्थराइटिस से पीड़ित आते हैं, जिनमें से 10 फीसदी मरीज युवा होते हैं। डॉ. अत्री ने बताया कि ज्यादातर युवा कंप्यूटर वर्क करना ही पसंद करते हैं और लगातार कंप्यूटर पर बैठकर गेम खेलते रहते हैं, जिनसे उनके जोड़ों में अकड़न आनी शुरू हो जाती है जो कि धीरे-धीरे आर्थराइटिस बीमारी का रूप ले लेता है।
वहीं सेक्टर-16 स्थित क्यूआरजी हेल्थ सिटी अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ हरीश घुटा ने बताया कि रयूमेटायड आर्थराइटिस एक क्रोनिक, आटो इम्युन बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों की सुरक्षा करने वाले ऊतक में सूजन व दर्द पैदा कर स्वस्थ जोड़ों पर हमला कर शरीर पर हमला करना शुरू कर देती है। इसकी पहचान जोड़ों में सूजन, दर्द और जकड़न से करना आसान है। डॉ घुटा ने बताया कि आर्थराइटिस न सिर्फ जोड़ों की बीमारी है, बल्कि यह बढ़ने पर फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित कर सकती है।
चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी का स्थायी इलाज संभव नहीं है लेकिन इसे अन्य क्रोनिक बीमारी मधुमेह की तरह ही प्रभावी रूप से नियंत्रित और प्रबंधित किया जा सकता है। हालांकि वह मानते हैं कि आर्थराइटिस के दर्द से राहत पाने के लिए दर्द निवारक दवाओं का अधिक सेवन करना सही नहीं है। चिकित्सकों की सलाह है कि जोड़ो में दर्द अथवा सूजन होने पर तुरंत अस्पताल में जांच करवाएं और समय रहते इसकी पहचान करें। जिससे इसे समय रहते बढ़ने से रोका जा सके।
माह आर्थराइटिस से पीड़ित मरीज
जून 40
जुलाई 64
अगस्त 72
सितंबर 85
अक्टूबर (अब तक) 60