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'पीरियड्स होना सामान्य बात है, पर बलात्कार नहीं'

Sat, 14 Mar 2015 11:57 AM IST
Updated Sat, 14 Mar 2015 11:57 AM IST
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'पी‌रियड्स होना सामान्य बात है, पर बलात्कार नहीं'

awareness against rape through messages on sanitary pad

भारत हो या कोई और देश, माहवारी में

इस्तेमाल होने वाले सैनिट्री पैड को लेकर अकसर अजीब सी हिचक और लभगभ शर्मिंदगी भरा एहसास रहता है। लेकिन दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया के कुछ छात्र-छात्राएँ इन्हीं सैनिट्री पैड्स का इस्तेमाल अनोखे ढंग से कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी में पिछले कुछ दिनों से पेड़ों के ईर्द -गिर्द, दीवारों पर आपको सैनिट्री पैड मिल जाएँगे और इन पर महिलाओं के मुद्दों से जुड़े संदेश लिखे रहते हैं। (साभारः /

'पी‌रियड्स होना सामान्य बात है, पर बलात्कार नहीं'

awareness against rape through messages on sanitary pad

असहज कर देने वाला एहसास- दरअसल छात्र -छात्राओं ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर जागरुकता लाने के लिए #padsagainstsexism नाम का अभियान शुरु किया है। इसमें बलात्कार, माहवारी, महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे हैं। ये लोग कैंपस में तो जगह- जगह सैनिट्री पैड पर संदेश छोड़ ही रहे हैं बल्कि सड़कों, बस स्टॉप्स पर आम लोगों के बीच जाकर भी ऐसा ही कर रहे हैं। पर वे लोग अभी बेनाम ही रहना चाहते हैं। सैनिट्री पैड के इस्तेमाल के इस तरीके का कुछ लोग दिल खोल कर समर्थन कर रहे हैं तो कई लोगों के लिए ये असहज कर देने वाला अनुभव है। यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बतौर टेस्ट दिल्ली में एक जगह पैड को लोगों के बीच रखा। इस मुहिम से जुड़ा एक शख़्स लोगों की प्रतिक्रिया बताता है, "हमने देखा कि लोगों ने पैड को देख कर नज़रें चुरा लीं। लड़के भी और लड़कियाँ भी। थोड़ी देर बाद गार्ड ने पैड को हटा दिया।" वहीं आश्चर्यजनक रूप से कई लोगों, ख़ासकर पुरुषों ने बिना झिझक इसका समर्थन किया और पैड के साथ फोटो भी खिंचवाई।

'पी‌रियड्स होना सामान्य बात है, पर बलात्कार नहीं'

awareness against rape through messages on sanitary pad

जब ट्विटर और इंस्टाग्राम पर दिल्ली की ये तस्वीरें डालीं गईं तो प्रतिक्रियाएँ कुछ इस तरह थी- "कोई नहीं देखना चाहता कि पैड कैसे दिखते हैं। मैं समझ सकती हूँ कि आप क्या कहना चाहते हैं। लेकिन सैनिट्री पैड पर संदेश लिखना अजीब है?" delhiexplorer नाम से इंस्टाग्राम पर किसी ने लिखा है- "आपकी ये पहल हमारे समाज की सोच बदलने में ज़रूर मददगार साबित होगी।" जबकि @van_lassen हैंडल से ट्विटर पर किसी ने अपनी बात कुछ यूँ लिखी है- फेमिनिस्ट अभियान के साथ तब ज़रूर कुछ गलत नज़र आता है जब वे पुरुषों के रवैए को बलात्कार और महावारी से जोड़ने लगते हैं।

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'पी‌रियड्स होना सामान्य बात है, पर बलात्कार नहीं'

awareness against rape through messages on sanitary pad

जर्मन लड़की ने की शुरुआतः ये अभियान भले ही दिल्ली में चल रहा है लेकिन इसे शुरु करने वाली हैं जर्मनी की 19 की इलोना। दिल्ली के छात्रों ने इलोना से प्रेरणा लेकर ही अपना अभियान शुरु किया है। इलोना महिला मुद्दों को लेकर काफ़ी सजग हैं। एक दिन उन्होंने खिड़की पर रखा पैड देखा और उनके दिमाग़ में ख़्याला आया कि क्यों न इसके इस्तेमाल संदेश देने के लिए किया जाए। तब से उन्होंने ये सामाजिक प्रयोग करना शुरु किया और अपने इंस्टाग्राम पर फ़ोटो डालने लगीं। उन्हें हर तरह की टिप्पणियों का सामना करना पड़ा लेकिन इलोना को इससे झुँझलाहट नहीं होती। बीबीसी से बातचीत में इलोना ने कहा, "मेरा मकसद है समाज में महिलाओं के प्रति सेक्सिज़म को लेकर लोगों का ध्यान खिंचना। मेरे इस अभियान की कोई तारीफ़ करे या आलोचना, आख़िरकर इस मुदे की चर्चा तो हो रही है।"

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'पी‌रियड्स होना सामान्य बात है, पर बलात्कार नहीं'

awareness against rape through messages on sanitary pad

विरोध भी और समर्थन भीः इलोना का अभियान इंस्टाग्राम पर देख दूसरे देश के लोगों ने भी ऐसी ही पहल की इच्छा जताई है। कैलिफ़ोर्निया से नीना तो कनाडा ने ब्रैंडा ने उन्हें लिखा कि वे भी अपने शहर में ऐसा ही करने वाली हैं। इलोना कहती हैं कि भारत में महिलाओं की स्थिति को लेकर जो सवाल हैं वो उनसे वाकिफ हैं और उन्हें ख़ुशी है कि भारत में सबसे पहले एक लड़के ने उनसे संपर्क कर सैनिट्री पैड अभियान शुरु करने की पहल की थी। उधर दिल्ली में छात्रों का अभियान जारी है हालांकि ये उनके लिए इतना आसान नहीं है।

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