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अनाज मंडी अग्निकांडः आधार कार्ड के बिना शव देने से इंकार, दिनभर इंतजार करते रहे परिजन

Wed, 11 Dec 2019 02:08 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Wed, 11 Dec 2019 02:08 AM IST
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anaj mandi fire Refusal to give autopsy without Aadhaar card
मृतक राहुल का शव लेने पहुंची महिला - फोटो : अमर उजाला

अनाजमंडी इलाके में चल रही फैक्टरी में आग लगने से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को अब सिस्टम की संवेदहीनता का शिकार होना पड़ रहा है। मृतकों का शव सौंपने के लिए दिल्ली पुलिस की एक शर्त ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है। 


 

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संजर का शव लेने पहुंची महिला - फोटो : अमर उजाला

मंगलवार सुबह पुलिस ने लोकनायक अस्पताल की मोर्चरी में बिहार के सहरसा जिला निवासी तीन मृतकों का शव परिजनों को इसलिए सौंपने से इंकार कर दिया, क्योंकि उनके पास मृतकों का आधार कार्ड नहीं था। परिजनों ने तीनों मृतकों की पहचान राशिद, संजर और ग्यास के रूप में बताई। रविवार को इनके दोस्तों ने शवों की शिनाख्त की थी। उस दौरान पुलिस ने कहा था कि पोस्टमार्टम तभी होगा जब किसी के आधार कार्ड में मृतक का नाम होगा, फिर चाहे वह बेटा हो या पत्नी। पुलिस की इस शर्त पर दोस्तों ने बिहार के सहरसा जिला निवासी मृतकों के परिजनों को फोन पर जानकारी दी। 

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मृतक राशिद के परिजन - फोटो : अमर उजाला

अपने बेटों के मातम में डूबे परिजन आनन-फानन में अपने घर से दिल्ली के लिए निकल पड़े। 24 घंटे से भी ज्यादा का सफर तय करने के बाद जब मंगलवार सुबह लोकनायक अस्पताल पहुंचे तो पुलिस ने मृतक का आधार कार्ड मांग लिया। परिजनों का कहना है कि आधार कार्ड मरने वालों के पास ही था। अब वो इमारत में बाकी सामान के साथ जल गया या नहीं। इसके बारे में कैसे बता सकते हैं। 

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शव गृह के बाहर खड़े परिजन - फोटो : Amar Ujala

परिजनों के अनुसार जब उन्होंने पुलिस को ये जानकारी दी तो पुलिस ने मृतक के आधार कार्ड पर मौजूद नंबर पूछ लिया। परिजनों ने फिर कहा, साहब हमें हमारे कार्ड का नंबर नहीं पता तो उनका नंबर कैसे पता होगा? गांव में आधार कार्ड हो भी तो उसकी तलाश करने वाला कोई नहीं है, सब लोग तो यहां आ गए। राशिद के भाई महबूब ने बताया कि सुबह से बार-बार बोलने के बाद भी पुलिस मानने को तैयार नहीं है। मंगलवार दोपहर 2 बजे तक पुलिस ने इनके पोस्टमार्टम कराने की मंजूरी नहीं दी। 

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मृतकों के परिजन - फोटो : अमर उजाला

वहीं संजर के दोस्त मोहम्मद जमाल ने बताया कि उनके फोन में पहले से ही दोस्त का आधार कार्ड था, इसलिए उन्हें जब याद आया तो मोबाइल के पुराने डाटा से निकाल कर दे दिया, लेकिन बाकी के आधार कार्ड नहीं हैं। पुलिस को लग रहा है कि हमारे पास बाकी दोनों के पहचान पत्र भी हैं, मगर जानबूझकर दे नहीं रहे हैं। 

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