दिल्ली: गर्भवती को ले जा रही एंबुलेंस पलटी, बड़ा हादसा टला
इस घटना में घायलों की पहचान गर्भवती महिला कविता (20), उसके पति राहुल (24), सास प्रेमलता (53) के अलावा एंबुलेंस कर्मचारी हरीश और चालक अनिल मीणा के रुप में हुई। उधर कैट्स एंबुलेंस कर्मचारियों ने इस घटना को लेकर ठेका कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है। कैट्स यूनियन का कहना है कि दिल्ली की निशुल्क एंबुलेंस सेवा अब मरीजों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। कई वाहन लंबे समय से खराब स्थिति में होने के बाद भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
कर्मचारियों को ठेका कंपनी जुर्माने का डर दिखाकर काम करवा रही है। इसी के चलते कर्मचारियों को वाहनों की हकीकत पता होने के बाद भी कंपनी के दवाब में आकर जर्जर एंबुलेंस लेकर मरीजों को लाने के लिए जाना पड़ता है। यूनियन की मानें तो इस एंबुलेंस की ब्रेक और एक्सिल लंबे समय से खराब थे। इसकी शिकायत भी कई बार कर्मचारियों ने की है, लेकिन दिल्ली सरकार का उदासीन रवैया और ठेका कंपनी के अधिकारियों की सांठगांठ के चलते एंबुलेंस ठीक नहीं कराई गईं।
कैट्स यूनियन के अध्यक्ष नरेंद्र लाकड़ा का कहना है कि वर्ष 1991 में दिल्ली में मरीजों को घर से अस्पताल ले जाने के लिए निशुल्क एंबुलेंस कैट्स सेवा शुरू हुई थी। वर्ष 2016 तक इसका संचालन दिल्ली सरकार के अधीन रहा, लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने करीब ढाई वर्ष पहले इसे एक प्राइवेट कंपनी के सुपुर्द कर दिया, जिसका खामियाजा यह है कि पहली बार एंबुलेंस मरीज को लेकर इतने बड़े हादसे का कारण बनी है। उन्होंने ये भी कहा कि इस घटना में अगर मरीज या उसके परिवार को कुछ होता तो दिल्ली सरकार के पास कोई जवाब नहीं होता।