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दिल्ली: गर्भवती को ले जा रही एंबुलेंस पलटी, बड़ा हादसा टला

Thu, 27 Sep 2018 06:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 27 Sep 2018 06:43 PM IST
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ambulance carrying pregnant woman turn down on road five injured delhi government on radar
यही एंबुलेंस पलटी थी - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के बवाना इलाके के पूठ-बरवाला रोड पर बीती रात महिला मरीज को लेकर जा रही एक एंबुलेंस पलट गई। लंबे समय से जर्जर इस एंबुलेंस का एक्सिल टूटने और ब्रेक फेल होने की वजह से नियंत्रण बिगड़ गया। इसके कारण एंबुलेंस सड़क पर अनियंत्रित होकर पलट गई। इस घटना में एंबुलेंस सवार महिला मरीज, उसके पति और सास को चोटें आई हैं। बता दें कि इस तरह का हादसा दिल्ली में पहली बार हुआ है।
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ambulance
साथ ही एंबुलेंस के दो कर्मचारी भी मामूली रुप से चोटिल हुए हैं। एंबुलेंस आंबेडकर अस्पताल से मरीज को बवाना स्थित जेजे कॉलोनी उसके घर छोड़ने जा रही थी। घटना के बाद घायलों को आनन फानन में पूठ स्थित महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि जांच में डॉक्टरों ने गर्भ में मौजूद शिशु को स्वस्थ्य बताया है।
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इस घटना में घायलों की पहचान गर्भवती महिला कविता (20), उसके पति राहुल (24), सास प्रेमलता (53) के अलावा एंबुलेंस कर्मचारी हरीश और चालक अनिल मीणा के रुप में हुई। उधर कैट्स एंबुलेंस कर्मचारियों ने इस घटना को लेकर ठेका कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है। कैट्स यूनियन का कहना है कि दिल्ली की निशुल्क एंबुलेंस सेवा अब मरीजों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। कई वाहन लंबे समय से खराब स्थिति में होने के बाद भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

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डेमो - फोटो : डेमो

कर्मचारियों को ठेका कंपनी जुर्माने का डर दिखाकर काम करवा रही है। इसी के चलते कर्मचारियों को वाहनों की हकीकत पता होने के बाद भी कंपनी के दवाब में आकर जर्जर एंबुलेंस लेकर मरीजों को लाने के लिए जाना पड़ता है। यूनियन की मानें तो इस एंबुलेंस की ब्रेक और एक्सिल लंबे समय से खराब थे। इसकी शिकायत भी कई बार कर्मचारियों ने की है, लेकिन दिल्ली सरकार का उदासीन रवैया और ठेका कंपनी के अधिकारियों की सांठगांठ के चलते एंबुलेंस ठीक नहीं कराई गईं।

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एंबुलेंस
दिल्ली में पहली बार हुआ है ऐसा हादसा
कैट्स यूनियन के अध्यक्ष नरेंद्र लाकड़ा का कहना है कि वर्ष 1991 में दिल्ली में मरीजों को घर से अस्पताल ले जाने के लिए निशुल्क एंबुलेंस कैट्स सेवा शुरू हुई थी। वर्ष 2016 तक इसका संचालन दिल्ली सरकार के अधीन रहा, लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने करीब ढाई वर्ष पहले इसे एक प्राइवेट कंपनी के सुपुर्द कर दिया, जिसका खामियाजा यह है कि पहली बार एंबुलेंस मरीज को लेकर इतने बड़े हादसे का कारण बनी है। उन्होंने ये भी कहा कि इस घटना में अगर मरीज या उसके परिवार को कुछ होता तो दिल्ली सरकार के पास कोई जवाब नहीं होता।     
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