दिल्ली को अक्टूबर से ड्राइवरलेस मेट्रो की सौगात मिल सकती है। इन दिनों इस फुली आटोमेशन मेट्रो ट्रेन का ट्रायल रन चल रहा है। इसे साल के अंत तक शुरू होने वाले फेज-तीन के ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसकी बहुत सी ऐसी खासियतें हैं जो आप जरूर जानना चाहेंगे।
दिल्ली को मिलने वाले ड्राइवरलेस मेट्रो में बहुत कुछ है खास, जानना चाहेंगे आप
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यह ट्रायल फिलहाल ड्राइवर के साथ शुरू होगा, जोकि बाद में हटा दिए जाएंगे। यह ट्रायल आगे फेज-तीन की पिंक लाइन मजलिस पार्क से शिव विहार कॉरिडोर लाइन पर होगा। अब दिल्ली मेट्रो वर्ल्ड के दूसरे मेट्रो की श्रेणी में खड़ा है।
मेट्रो के मुताबिक, इसका ट्रायल पिंक लाइन से शुरू किया गया है, जोकि बाद में मजेंटा लाइन पर भी होगा। इसमें ड्राइवर केबिन नहीं होने से यात्रियों को लाभ मिलेगा। इसमें ज्यादा लोग सफर कर पाएंगे। मेट्रो के मुताबिक, मुकुंदपुर से जिस मेट्रो डिपो से पूरा ट्रायल शुरू हुआ है, वहां सोलर प्लांट का भी शुरू किया गया है। इससे छह किलोवाट से ज्यादा बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।
बिना चालक के मेट्रो की खास बातें-
81 ड्राइवर लेस मेट्रो ट्रेनें दिल्ली मेट्रो ने खरीदी हैं।
19 दक्षिण कोरिया में बन रही हैं।
61 बंगलूरू में बनकर तैयार हो रही हैं।
240 लोग पहले की तुलना में ज्यादा यात्रा कर पाएंगे।
67 फीसदी ट्रेनों का मोटर कार होगा, दो डिब्बे बिना मोटर वाले होंगे।
20 फीसदी ऊर्जा की खपत कम होगी।
वाई-फाई की सुविधा भी
ड्राइवर लेस इस मेट्रो ट्रेन में वाई-फाई देने की भी तैयारी है। इन डिब्बों को इसी मकसद से तैयार किया गया है। दरवाजों पर स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिसमें मेट्रो से जुड़ी सूचनाओं के अलावा वीडियो भी चलाया जा सकता है। इसके अलावा दिव्यांगों के लिए मेट्रो ट्रेन ज्यादा आरामदायक होगी। व्हील चेयर वाले हिस्से में पीठ को सहारा देने के लिए विशेष बैकरेस्ट लगाया गया है। खड़े होकर यात्रा करने वालों के लिए पोल व ग्रैब रेल को दोबारा से डिजाइन किया गया है।