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1 महीना, 125 एम्स डॉक्टर, रोज 8 घंटे प्रैक्टिस, तब इस तकनीक से अलग हुए सिर से जुड़े बच्चे

Mon, 12 Feb 2018 01:32 PM IST
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 12 Feb 2018 01:32 PM IST
aiims 125 doctors daily practice on 3d head before separation of odisha brothers attach from head
aiims - फोटो : अमर उजाला

एम्स के डॉक्टरों ने सिर से जुड़े दो भाइयों को 3डी तकनीक के जरिये सर्जरी कर नया जीवन दिया है। इस अत्याधुनिक तकनीक से उपचार आज दुनिया भर में कौतूहल का विषय बन गया है। दरअसल ओडिशा के रहने वाले जग्गा और बलिया के सिर का ऑपरेशन दुर्लभ और बेहद चुनौतीपूर्ण घटना थी।

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aiims - फोटो : अमर उजाला

अमेरिका से दो 3डी सिर मंगवा कर 125 डॉक्टरों की टीम ने करीब एक महीने तक रोजाना आठ-आठ घंटे तक इन पर सर्जरी की प्रैक्टिस की। उन मॉडल सिर के अंदर किस नस को काटना और कहां जोड़ना है, जग्गा और बलिया को किस तरह ऑपरेशन टेबल पर लिटाना है डॉक्टरों की टीम ने इसकी पूरी तैयारी की थी। गौरतलब है कि 25 अक्तूबर 2017 को मैराथन ऑपरेशन के करीब चार माह बाद जग्गा और बलिया अब स्वस्थ  हैं। 

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aiims - फोटो : अमर उजाला

ऐसा था अमेरिका से आया 3डी सिर
जिस सिर पर डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे थे, वह 3डी प्रिंटिंग युक्त अमेरिकी तकनीक है। इसे बनवाने में एम्स के डॉक्टरों को करीब 10 लाख रुपये और करीब महीने भर का वक्त लगा था। अमेरिकी वैज्ञानिक जेम्स गुडरिज ने जग्गा और बलिया के आकार के दो सिर बनाए थे।

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aiims 125 doctors daily practice on 3d head before separation of odisha brothers attach from head
aiims - फोटो : अमर उजाला

इस सिर को देखकर असली-नकली में फर्क करना मुश्किल है। इसमें बाकायदा दोनों भाइयों के सिर की नसें, कपाल, जबड़ा, दांत हर चीज दिखाई देती है। इसी की मदद से डॉक्टरों को पता चला कि ऑपरेशन के दौरान सिर के कौन से भाग की सर्जरी करनी है और कौन सी नस को कहां से जोड़ना है।

aiims 125 doctors daily practice on 3d head before separation of odisha brothers attach from head
aiims - फोटो : अमर उजाला

सबसे जरूरी था बच्चों को बचाना एम्स के न्यूरो साइंस सेंटर के प्रोफेसर डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि अभी तक इस तरह के कई केस सामने आए, जिन्हें ऑपरेशन थियेटर तक तो ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। यही वजह है कि फरवरी 2017 में जब जग्गा और बलिया पहली बार एम्स आए तो डॉक्टरों के लिए सबसे पहले उनकी जान बचाना जरूरी था।

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