इसे इत्तेफाक ही कहेंगे कि बेटी की हत्या का आरोप झेल रहे तलवार दंपति को कोर्ट ने उस दिन बरी किया जिस दिन महिलाएं बच्चों की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं। अहोई अष्टमी पर नूपुर बृहस्पतिवार सुबह से ही निर्जल थीं, ऐसे में बैरक में बंद महिलाओं का कहना था कि नूपुर बेटी की आत्मा की शांति के लिए निर्जल हैं।
आरुषि हत्याकांड : सुबह से निर्जल थी आरुषि की मां, फैसला आने पर निकले आंसू...
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जेल प्रशासन के अनुसार बैरक नंबर 14 में बंद नूपुर जेल में रहने वाले करीब 15 बच्चों और 15-20 महिलाओं को पढ़ाती थीं। बुधवार शाम करीब सात बजे राजेश और नूपुर ने हल्का भोजन किया। करीब आठ बजे चाय, दलिया और पाव का नाश्ता पहुंचा तो नूपुर ने खाने से इंकार कर दिया। उन्होंने सुबह से पानी तक नहीं पीया। महिलाएं और बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंचे तो उन्हें काम देकर वह गुरबानी पढ़ने लगीं। इस दौरान उन्होंने किसी से बात नहीं की। टीवी पर उनकी रिहाई का निर्णय आते ही बैरक के एक कोने पर बैठकर रोती रहीं। कुछ महिलाओं ने उनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने इंकार कर दिया। मीडिया से भी बात करने से इंकार कर दिया।
शुक्रवार शाम तक डासना जेल से छूटने की उम्मीद
डासना जेल अधीक्षक दधिराम मौर्य ने बताया कि हाईकोर्ट से रिहाई का आर्डर आने के बाद ही राजेश और नूपुर को रिहा किया जाएगा। मीडिया के माध्यम से उनको बरी किए जाने की जानकारी मिल चुकी है। कोर्ट का आर्डर शुक्रवार तक पहुंचने की उम्मीद है। शुक्रवार दोपहर तक ऑर्डर मिलने के बाद शाम तक दोनों की रिहाई हो सकेगी।
राजेश ने 1466 दिन, नूपुर ने 1293 दिन काटी सजा
बेटी आरुषि की हत्या के आरोप में 26 नवंबर 2013 को सजा सुनाए जाने के बाद से राजेश और नूपुर डासना जेल में बंद हैं। सजा सुनाए जाने से पहले नूपुर 30 अप्रैल 2012 से 25 सितंबर 2012 तक चार माह 26 दिन और राजेश 23 मई 2008 से 12 जुलाई 2008 तक एक माह 20 दिन जेल में रह चुके हैं। केस ट्रायल के दौरान और हाईकोर्ट के निर्णय के दिन तक कुल मिलाकर राजेश तलवार 1466 दिन और नूपुर 1293 दिन सजा काट चुके हैं। नुपुर हाईकोर्ट के आदेश पर चार बार शॉर्ट टर्म बेल पर जेल से बाहर रही हैं। 05 मई से 27 सितंबर 2016 तक, चार अक्टूबर से 16 नवंबर 2016 तक, 06 दिसंबर 2016 से 04 जनवरी 2017 तक और 17 जनवरी से 15 फरवरी 2017 तक नूपुर जमानत पर रहीं हैं।
तीन दिन पहले मिलने आए थे साढ़ू
जेल प्रशासन के अनुसार राजेश के साढ़ू दिनेश तलवार तीन दिन पहले उनसे मिलने आए थे। सूत्रों की मानें तो उनसे भी उन्होंने हाईकोर्ट के निर्णय को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि बृहस्पतिवार को कोर्ट के निर्णय के दौरान उनसे कोई मिलने नहीं पहुंचा। नूपुर ने बृहस्पतिवार का दिन अपने बैरक में और राजेश ने अस्पताल परिसर में बिताया।