छाया की उम्र भले ही 11 साल की थी लेकिन, स्कूल में एक बात उसे रोज परेशान करती थी। प्यास लगने पर स्कूल के नल पर जाकर पानी पीने में उसे बहुत परेशानी होती थी। उसके स्कूल में पीने के पानी के नल तो लगे थे, लेकिन वो इतने ऊंचे होते थे कि छाया और उसके ज्यादातर दोस्तों के कपड़े गीले हो जाते थे। छाया इस परेशानी से रोज जूझती और जब भी इस बारे में अपने टीचर या घरवालों को बताती तो एक ही जवाब मिलता, स्कूलों में तो नल ऐसे ही लगते हैं।
इग्नाइट प्रतियोगिता के बारे में पता चला
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छाया
- फोटो : संजीव श्रीवास्तव
तभी उसे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इग्नाइट प्रतियोगिता के बारे में पता चला। असल में इस प्रतियोगिता के माध्यम से देश भर के ऐसे बच्चों (जिनकी उम्र 17 साल से कम हो) को अपने विचार देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जो रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली किसी परेशानी के समाधान की तकनीक सुझाते हैं। अब तक के अपने अनुभवों से छाया को ये बात तो पता चल चुकी थी कि कोई उसकी बात को गंभीरता से नहीं लेने वाला। फिर भी उसने तय किया कि वो स्कूल में नल वाली समस्या के बारे में ही बताएगी और इसका समाधान भी देगी।
इग्नाइट प्रतियोगिता के बारे में पता चला
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इग्नाइट प्रतियोगिता ने उसकी बात को गंभीरता से लिया गया जो छाया के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। छाया को इस प्रतियोगिता में चुन लिया गया और उसे अपनी समस्या रखने और उसके समाधान के बारे में विस्तार से बताने के लिए बुलाया गया। छाया ने जो समाधान सुझाया उसे राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (National Innovation Foundation-India) ने स्वीकार किया और छाया के सुझाव पर उसके बताए अनुसार पानी के नलों को अलग-अलग ऊंचाई के सीढ़ीनुमा क्रम में लगाया गया।
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छाया
- फोटो : संजीव श्रीवास्तव
छाया के इस आविष्कार ने छोटे और कम लंबाई वाले बच्चों को स्कूल में पानी पीते वक्त आने वाली समस्या का एक झटके में समाधान दे दिया। 13 वर्षीय छाया शंभोजी ठाकुर अपने मां-पिता और तीन भाई-बहनों के साथ गुजरात के गांधी नगर के मंसा ताल्लुक के बोरु गांव में रहती है। छाया के पिता दुकान चलाते हैं और मां गृहणी हैं। छाया अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। वो अब विद्याधाम प्राइमरी स्कूल में नहीं पढ़ती, लेकिन वहां के अध्यापक मेहुर भाई को याद करते हुए उसने बताया,'उन्होंने इस आइडिया को विकसित करने में मेरी बहुत मदद की थी।'
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असल में बोरु गांव में बना विद्याधाम प्राइमरी स्कूल आठवीं तक ही है। छाया अब नौवीं कक्षा में पढती है और श्री पटेल केजी परिकर आदर्श विद्यालय की छात्रा है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौधोगिकी मंत्रालय के अधीन काम करने वाले राष्ट्रीय नवप्रर्तन प्रतिष्ठान ने देशभर की ऐसी ही प्रतिभाओं को एक छत के नीचे जमा किया है जिनसे आप भी मिल सकते हैं और उनके आविष्कार देख सकते हैं। छाया को भी इस प्रदर्शनी में आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रपति भवन के इस प्रांगण में आकर और इतने सारे लोगों से मिलकर वो बहुत खुश है और चाहती है कि देशभर के स्कूलों में बच्चों के लिए ऐसे ही नल लगाए जाएं। सरकार ने भी इस दिशा में काम करना शुरु कर दिया है।