हर साल 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे मनाया जाता है, जिसे लोग प्यार का त्योहार मानकर सेलिब्रेट करते हैं। वेलेंटाइन डे प्रेम करने वालों के लिए एक खास और यादगार दिन होता है। तो चलिए जानते हैं देहरादून के ही कुछ ऐसे प्रेमी जोड़ों की मोहब्बत की कहानी, जिन्होंने अपनी मोहब्बत को ही यादगार बना दिया।
Valentine Day: नजरों के रास्ते दिल में उतरी इनकी मोहब्बत, कुछ ऐसी हैं इन जोड़ों की प्रेम कहानी...
...और प्यार में बदल गई बचपन की दोस्ती
मोहकमपुर एकता विहार निवासी रोहित असवाल और निहारिका शर्मा ऐसा कपल है, जो बचपन से एक दूसरे को जानता है और आज दोनों एक साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं। निहारिका दूरदर्शन में कार्य करती हैं। जबकि रोहित असवाल एनबीसी कंपनी में इंजीनियर हैं। उनकी शादी में काफी अड़चनें आई, लेकिन दोनों का एक-दूसरे पर विश्वास बना रहा और वर्ष 2014 में विवाह कर जीवन भर के लिए एक हो गए। निहारिका बताती है कि रोहित के पिताजी तो शादी के लिए तैयार हो गए, लेकिन इंटरकास्ट होने के कारण उनके मां और भाई इसके लिए राजी नहीं हुए। इस बीच उसके अपने घरवालों को मनाने की काफी कोशिश की लेकिन वह नहीं माने। करीब दस साल तक दोनों ने इंतजार किया।
पहली मुलाकात
वह बताती हैं कि उसके मामा लखनऊ में रहते थे। जिस कॉलोनी में मामा रहते थे, उसी कॉलोनी में रोहित के पिताजी भी रहते थे। इसलिए दोनों में बचपन में काफी दोस्ती थी। बड़े हुए तो दोनों अलग हो गए। इसके बाद रोहित ने फेसबुक के माध्यम से मेरा पता लगाया। फेसबुक पर बात होने के बाद दोनों फोन पर बात करने लगे और दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे। बाद में दोनों ने एक दूसरे के साथ शादी का मन बना लिया।
यादगार लम्हा
वह बताती हैं कि मामा की मदद से किसी तरह से मम्मी तैयार हुई, लेकिन भाई तैयार नहीं हुआ। आखिरकार 2014 में घरवालों ने हां कर दी और दोनों शादी के बंधन में बंध गए।
पहली मुलाकात में जुड़ गया जन्मों का बंधन
आईएएस डॉ. आशीष श्रीवास्तव और उनकी पत्नी ईवा श्रीवास्तव पहली मुलाकात में ही एक-दूसरे को अपना दिल दे बैठे थे। घरवालों की रजामंदी से दोनों की शादी हुई और उनके प्यार को मंजिल मिली। आज दोनों अपने दो बच्चों के साथ हंसी-खुशी गृहस्थ जीवन बिता रहे हैं।
2010 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने सिविल सर्विसेज में चुने जाने से पहले बीएचयू में काफी समय तक पढ़ाने का काम किया। 2012 में परिवार वालों ने रांची निवासी 2011 बैच की आईएएस अधिकारी ईवा को उनके लिए पसंद किया। उस दौरान आशीष की पोस्टिंग उत्तराखंड और ईवा की हिमाचल में थी। घरवालों के कहने पर आशीष, ईवा से मिलने के लिए धर्मशाला पहुंच गए। पहली मुलाकात में ही दोनों एक-दूसरे से काफी घुलमिल गए। 2012 में धूमधाम से दोनों की शादी हो गई।
इसके बाद ईवा को भी उत्तराखंड में पोस्टिंग मिल गई। आशीष और ईवा को प्रदेश में नौकरशाहों की सबसे अच्छी जोड़ियों में गिना जाता है। दोनों की अंडरस्टैंडिंग और केमिस्ट्री गजब है, जो अक्सर उनके साथ होने पर देखी भी जाती है। डॉ. आशीष श्रीवास्तव की गिनती आज प्रदेश के ईमानदार और तेजतर्रार नौकरशाहों में की जाती है। आशीष के पास राजधानी का जिलाधिकारी होने के साथ ही एमडीडीए वीसी, स्मार्ट सिटी सीईओ जैसी अहम जिम्मेदारियां भी हैं। वहीं, ईवा श्रीवास्तव जीएमवीएन में एमडी का जिम्मा संभाल रही हैं।
जय-प्रीति के लिए हर दिन वैलेनटाइन-डे
जो प्यार एक दिन तक सिमटकर रह जाए वो रिश्ता कैसा, प्यार तो वो है जिसमें हर दिन वैलेनटाइन-डे का अहसास हो। देहरादून के जय कश्यप और प्रीति का कुछ ऐसा ही मानना है। जय-प्रीति की लव स्टोरी भी दिलचस्प है। एक पार्टी में चंद सेकेंड के लिए जय और प्रीति का आमना-सामना क्या हुआ, बस जय ने प्रीति को दिल दे दिया। इसके बाद कड़ी मेहनत के बाद जय की प्रीति से मुलाकात संभव हो सकी और प्यार परवान चढ़ने लगा। करीब डेढ़ साल तक एक-दूसरे को जानने-समझने के बाद आखिर जय और प्रीति ने जीवनसाथी बनने का फैसला किया। रेसकोर्स निवासी जय आईटी पार्क में एचआर मैनेजर के पद पर हैं जबकि प्रीति योगा इंस्ट्रक्टर हैं।
पहली मुलाकात
जय बताते हैं कि फैमिली पार्टी में उनकी प्रीति से पहली मुलाकात हुई थी। उस पल को वह कभी भूल नहीं सकते। भले ही उस पार्टी में उन्हें बात करने का मौका नहीं मिला, लेकिन वह समय खास था।
यादगार लम्हा
जय कहते हैं कि 15 जून 2019 को अपने बर्थ-डे के दिन प्रीति कॉलेज का रजिस्ट्रेशन कराने देहरादून आई थी। इसी दिन उन्होंने प्रीति के लिए सरप्राइज पार्टी रखी थी, जिसमें फैमिली के सदस्यों को भी बुलाया गया था। प्रीति को जब सरप्राइज का पता चला, उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
क्रिकेट कोच पवन ने ‘प्यार की पिच’ पर भी पाई सफलता
ये जिंदगी चल तो रही थी, लेकिन तेरे आने से मैने जीना शुरू किया...’ कुछ ऐसी ही दास्तां है क्रिकेट कोच पवन पाल की। इंटरकास्ट मैरिज करने वाले पवन ने अपना प्यार पाने के लिए बहुत मेहनत की। सालभर का इंतजार और राखी के परिवार की नाराजगी ने पवन के प्यार की कड़ी परीक्षा ली, लेकिन प्यार सच्चा हो तो मंजिल मिल ही जाती है।
पहली मुलाकात
पवन की राखी से पहली मुलाकात 2 मार्च 2012 में हुई, जब वह देहरादून में हाई ज्यूडिसियल सर्विस (एचजेएस) की परीक्षा देने आई थी। तब पवन के एक दोस्त ने राखी से परिचय कराया था। पहली नजर में ही पवन का दिल राखी पर आ गया। इसके बाद उन्होंने राखी से बातचीत शुरू करने के लिए बहुत पापड़ बेले।
यादगार लम्हा
12 अप्रैल 2012 का दिन पवन की लव स्टोरी का यादगार लम्हा रहा है। पवन बताते हैं कि राखी ने बहुत रिक्वेस्ट करने के बाद मुलाकात के लिए हां कहा था। तब वह पहली बार राखी से मिलने उनके घर बागपत गए थे। कहीं कोई देख न ले, इस डर के कारण उन्होंने राखी से सुबह 5 बजे यमुना किनारे मुलाकात की। उस समय लोग मॉर्निंग-वॉक के लिए निकलने शुरू हो रहे थे। उस समय वह राखी से महज पांच मिनट की मुलाकात करने देहरादून से बागपत गए थे। कड़ी मशक्कत के बाद 2013 में उनकी शादी हुई।