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Uttarkashi: वरुणावत पर्वत के ट्रीटमेंट में देरी पड़ सकती है भारी, तत्काल शुरू हो काम...लोगों की ये गलती है वजह

Mon, 09 Sep 2024 10:54 AM IST
रेनू सकलानी अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी
अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 09 Sep 2024 10:54 AM IST
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Uttarkashi Varunavat mountain Delay in treatment of Varunavat mountain may prove costly
वरुणावत पर्वत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

वरुणावत पर्वत पर जहां भूस्खलन हुआ है वह संवेदनशील क्षेत्र है। जो कि अब दोबारा सक्रिय हो गया है। इसके ट्रीटमेंट में देरी नहीं की जानी चाहिए। ट्रीटमेंट में देरी खतरे को बढ़ा सकती है। इस पर्वत पर भूस्खलन की एक बड़ी वजह मानवीय हस्तक्षेप है। पहाड़ की तलहटी को खोदने के साथ लोग अब ऊपर की तरफ बढ़ते जा रहे थे, इससे पहाड़ पर बोझ बढ़ा है। इसी वजह से भूस्खलन हुआ है।

यह कहना है कि वर्ष 2003 में वरुणावत पर्वत पर हुए भूस्खलन के बाद उसके ट्रीटमेंट कार्य की अगुवाई करने वाले भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के तत्कालीन निदेशक डॉ. पीसी नवानी का। डॉ. नवानी ने 21 साल बाद वरुणावत पर दोबारा भूस्खलन होने पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इस पहाड़ पर जो भी दिक्कतें आई हैं उसकी एक बड़ी वजह मानवीय हस्तक्षेप हैं।

पहाड़ की तलहटी में तो लोगों ने घरों का निर्माण किया ही है, अब लोग ऊपर की तरह बढ़ते जा रहे हैं। उनके सीवर और घरों के पानी की निकासी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। यह पानी पहाड़ की तलहटी में ही जाता है। इससे पहाड़ पर बोझ बढ़ने के चलते बरसात में नया भूस्खलन जोन खुला है।

Uttarkashi Varunavat mountain Delay in treatment of Varunavat mountain may prove costly
विशेषज्ञों की टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

उन्होंने बताया कि छोटा भूस्खलन यह संकेत होता है कि जोन सक्रिय हो गया है। छोटे भूस्खलन को नजरंदाज करने की जगह उसका जल्द ट्रीटमेंट होना चाहिए, जिससे कि समस्या न बढ़े। उन्होंने कहा कि वरुणावत पर्वत पर फिर कोई नया भूस्खलन एक्टिव न हो, इसके लिए जरूरी है कि पहाड़ की तरफ निर्माण न हो और बफर जोन खाली रहे।

Uttarkashi Varunavat mountain Delay in treatment of Varunavat mountain may prove costly
वरुणावत पर्वत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

भू-वैज्ञानिक डॉ.पीसी नवानी बताते हैं कि वर्ष 2003 में जब भूस्खलन शुरू हुआ था तो पूरे उत्तरकाशी शहर को ही शिफ्ट करने की बात उठी थी। जिस पर उस समय 5000 करोड़ रुपये खर्च होते, जिसका उन्होंने विरोध किया था।

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Uttarkashi Varunavat mountain Delay in treatment of Varunavat mountain may prove costly
टीम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

इसके बाद में केंद्र से मिले 250 में से मात्र 58 करोड़ रुपये में ही पर्वत के शीर्ष का विश्वस्तरीय ट्रीटमेंट पूरा कर दिया गया था, जो कि अगले 100 सालों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

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Uttarkashi Varunavat mountain Delay in treatment of Varunavat mountain may prove costly
वरुणावत पर्वत - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

भू-वैज्ञानिक डॉ.पीसी नवानी ने वरुणावत पर 23 सितंबर 2003 में हुए भूस्खलन की एक महीना पहले ही चेतावनी दे दी थी। उन्होंने बताया कि जीएसआई के कुछ अधिकारी यहां काम कर रहे थे। तब उन्होंने यह रिपोर्ट दे दी थी कि यहां बड़ा भूस्खलन हो सकता है। तत्कालीन डीएम ने इसे गंभीरता से लेकर लोगों को समय रहते हटा लिया था, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई थी।

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