वरुणावत पर्वत पर जहां भूस्खलन हुआ है वह संवेदनशील क्षेत्र है। जो कि अब दोबारा सक्रिय हो गया है। इसके ट्रीटमेंट में देरी नहीं की जानी चाहिए। ट्रीटमेंट में देरी खतरे को बढ़ा सकती है। इस पर्वत पर भूस्खलन की एक बड़ी वजह मानवीय हस्तक्षेप है। पहाड़ की तलहटी को खोदने के साथ लोग अब ऊपर की तरफ बढ़ते जा रहे थे, इससे पहाड़ पर बोझ बढ़ा है। इसी वजह से भूस्खलन हुआ है।
Uttarkashi: वरुणावत पर्वत के ट्रीटमेंट में देरी पड़ सकती है भारी, तत्काल शुरू हो काम...लोगों की ये गलती है वजह
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उन्होंने बताया कि छोटा भूस्खलन यह संकेत होता है कि जोन सक्रिय हो गया है। छोटे भूस्खलन को नजरंदाज करने की जगह उसका जल्द ट्रीटमेंट होना चाहिए, जिससे कि समस्या न बढ़े। उन्होंने कहा कि वरुणावत पर्वत पर फिर कोई नया भूस्खलन एक्टिव न हो, इसके लिए जरूरी है कि पहाड़ की तरफ निर्माण न हो और बफर जोन खाली रहे।
भू-वैज्ञानिक डॉ.पीसी नवानी बताते हैं कि वर्ष 2003 में जब भूस्खलन शुरू हुआ था तो पूरे उत्तरकाशी शहर को ही शिफ्ट करने की बात उठी थी। जिस पर उस समय 5000 करोड़ रुपये खर्च होते, जिसका उन्होंने विरोध किया था।
इसके बाद में केंद्र से मिले 250 में से मात्र 58 करोड़ रुपये में ही पर्वत के शीर्ष का विश्वस्तरीय ट्रीटमेंट पूरा कर दिया गया था, जो कि अगले 100 सालों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
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भू-वैज्ञानिक डॉ.पीसी नवानी ने वरुणावत पर 23 सितंबर 2003 में हुए भूस्खलन की एक महीना पहले ही चेतावनी दे दी थी। उन्होंने बताया कि जीएसआई के कुछ अधिकारी यहां काम कर रहे थे। तब उन्होंने यह रिपोर्ट दे दी थी कि यहां बड़ा भूस्खलन हो सकता है। तत्कालीन डीएम ने इसे गंभीरता से लेकर लोगों को समय रहते हटा लिया था, इसलिए कोई जनहानि नहीं हुई थी।