सिलक्यारा सुरंग हादसे पर अब मार्मिक कविताएं भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही है। जिनके माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार से श्रमिकों को जल्द से जल्द सुरंग से बाहर निकालने की अपील की जा रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर प्रशांत चौहान ने इस हादसे पर एक मार्मिक कविता साझा की है। कविता की पंक्तियां कुछ इस तरह हैं कि अब तो निकालिए सुरंग से मुझको, मुझे अपने घर जाना है। किया था वादा जो परिवार से, वह वादा निभाना है।
निभाना है फर्ज बेटे का, कर्ज पिता का मुझे चुकाना है। पथरा गई होंगी मां की आंखें, उन्हें ढांढस दिलाना है। पहुंचकर पास पत्नी के खुशी के आंसु उसे रुलाना है। भाई के इंतजार को, अब और नहीं बढ़ाना है।
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सुरंग के बाहर परेशान परिजन
- फोटो : amar ujala
बैठा होगा मुहाने पर, उसे और अब नहीं जगा सकता। बच्चे बिलख रहे हैं, घर में उनको भी गले लगाना है।
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सुरंग में रेस्क्यू अभियान जारी
- फोटो : amar ujala
उत्तरकाशी के ही लोकगायक व कवि ओम प्रकाश सेमवाल लिखते हैं कि बूढ़ी मां की आंखें तरसी, कब आएगा मेरा बेटा बाहर, आहट सुनाई नहीं दे रही, मुझे चारों पहर।
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सिलक्यारा में सुरंग के पास बैठी महिला
- फोटो : एजेंसी
टनल के भीतर से चल रहे बचाव अभियान को झटका लगने के बाद रविवार को नए जोश के साथ बचाव दलों ने चौतरफा बचाव अभियान तेज कर दिया है।
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इंतजार में बैठे श्रमिक।
- फोटो : amar ujala
भीतर जहां फंसे ब्लेड को काटकर निकालने में तेजी आई तो ऊपर से भी ड्रिल शुरू कर दी गई। वहीं, टनल के दूसरे सिरे से भी एस्केप टनल बनाने का काम तेज कर दिया गया है।