उत्तराखंड में जंगलों की आग रविवार को और विकराल हो गई। आग के जगह-जगह आबादी क्षेत्र तक पहुंचने से हड़कंप मचा रहा। वनकर्मी और ग्रामीण आग बुझाने में जुटे रहे। वन संपदा को भारी नुकसान हुआ है। वन्य जीव आबादी क्षेत्रों की ओर रुख करने लगे हैं। कई जगहों पर शरारती तत्वों की ओर से आग लगाए जाने की आशंका है।
बागेश्वर में वृक्ष मित्र किशन सिंह मलड़ा के बसाए शांति शहीद वन में आग लग गई। इससे विभिन्न प्रजातियों के दो हजार से अधिक पेड़-पौधे जलकर नष्ट हो गए हैं। आशंका है कि शरारती तत्वों ने जंगल में आग लगाई होगी। वृक्ष मित्र मलड़ा ने अराजक तत्वों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।
उत्तराखंड में आग का तांडव: 40 स्थानों पर धधक रहा पहाड़, 24 घंटे में 69 हेक्टेयर जंगल को हुआ नुकसान
मलड़ा ने वर्ष 2006-07 में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों की याद में शांति शहीद वन की स्थापना की थी। इसमें बांज, बुरांश, उतीस, रुद्राक्ष, पीपल, पांगर, तेजपत्ता, आंवला, बांस, रिंगाल सहित कई प्रजातियों के चौड़ी पत्तीदार और छायादार पेड़-पौधे हैं।
बनबसा में हुड्डनदी किनारे छीनी कक्ष संख्या 17 के जंगल में झाड़ियों में आग लग गई। वन दरोगा भुवन चंद्र कांडपाल ने बताया कि वन विभाग ने ग्रामीणों की मदद से इसे बुझा दिया। रानीखेत तहसील के चौकुनी में जंगल की आग आबादी की तरफ बढ़ गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। चारों तरफ धुआं फैल गया। दो महिलाएं पोल्ट्री फार्म से मुर्गियों को बचाने गईं थीं जिन्हें दमकल टीम ने बमुश्किल बचाया। टीम ने सड़क किनारे के पांच मकानों तक आग को पहुंचने से रोका। तकरीबन एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
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उत्तराखंड के जंगलों में आग
- फोटो : अमर उजाला
बागेश्वर के आरे, कुकुड़माई, नदीगांव के जंगलों में आग लगी तो कांडा और दुग नाकुरी तहसील के जंगल भी धधकते रहे। धरमघर रेंज के अधिकांश जंगल आग से नष्ट हो चुके हैं। काफलीगैर और गरुड़ तहसील के जंगलों में भी आग से काफी नुकसान पहुंचाया है। बागेश्वर जिले में पिछले छह माह में आग की 99 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 30 पिछले वर्ष की हैं जबकि इस वर्ष जनवरी से अब तक 69 घटनाएं हो चुकी हैं। इस दौरान 135 हेक्टेयर वन आग की चपेट में आए और करीब चार लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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उत्तराखंड के जंगलों में आग
- फोटो : अमर उजाला
भवाली में रविवार को सातताल रोड स्थित भगत्यूड़ा से सटा जंगल सुबह से शाम तक धधकता रहा। आग से काफल में लगे फल झड़कर नष्ट हो गए हैं तो बुरांश के फूल झुलस गए हैं। धारी, ओखलकांडा और रामगढ़ ब्लॉक के जंगलों में लगी आग के चलते वन्य जीव आबादी की तरफ रुख करने लगे हैं। रानीबाग के पास अमृतपुर, सूड़ी, बेलगढ़ के जंगलों में लगी आग खेतों तक पहुंच गई। इससे कई किसानों की गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों ने एकजुट होकर घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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उत्तराखंड के जंगलों में आग बुझाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
हल्द्वानी का ट्रंचिंग ग्राउंड दूसरे दिन भी सुलगता रहा। आग के धुएं के कारण गौलापार और इंदिरानगर क्षेत्र में धुंध छाई रही। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में टीम आग बुझाने में लगी रही, लेकिन आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। सीमांत जिले पिथौरागढ़ के आठ विकासखंडों में जगह-जगह जंगल आग से धधक रहे हैं। एसडीओ एनसी पंत के मुताबिक पिथौरागढ़ जिले में 200 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में आग लगने की 120 से अधिक घटनाएं पूरे जिले में हुईं।
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उत्तराखंड के जंगलों में आग बुझाते लोग
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पंत के मुताबिक रविवार को ही नौ जगह वन विभाग को आग लगने की सूचनाएं मिली। पिथौरागढ़ में शनिवार रात बड़ौली के जंगलों में भीषण आग लग गई, जिसे ग्रामीणों ने बुझाया। ग्राम सभा जीबी के जंगलों में असामाजिक तत्वों ने आग लगा दी। धारचूला में नेपाल और धारचूला के सीमावर्ती क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने के कारण जौलजीबी से लेकर धारचूला तक सभी जगहों धुंध छाई हुई है।