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Kisan Rally : कृषि कानूनों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए बुलाई रैली पर विरोध कर रहे किसानों और विपक्षियों का विरोध पड़ा भारी

Fri, 18 Dec 2020 11:25 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal चंदन बंगारी, अमर उजाला, रुद्रपुर
चंदन बंगारी, अमर उजाला, रुद्रपुर Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 18 Dec 2020 11:25 AM IST
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uttarakhand news : BJP sangthan kisan rally in rudrapur not successful
- फोटो : amar ujala

कृषि कानूनों के खिलाफ तराई में उठ रही विरोध की आवाजों को थामने के लिए बुलाई गई भाजपा की किसान रैली कोई विशेष संदेश और प्रभाव छोड़ने में कामयाब नहीं हो सकी। दो जिलों की 12 विधानसभाओं की रैली में अपेक्षा के अनुरूप भीड़ नहीं जुट सकी। आलम यह रहा कि रैली में किसानों की संख्या कम और नेताओं, कार्यकर्ताओं की संख्या अधिक रही। कृषि कानूनों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए बुलाई गई रैली पर कानूनों का विरोध कर रहे किसानों और विपक्षियों का विरोध ही भारी पड़ा।

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- फोटो : amar ujala

रैली के कमजोर प्रदर्शन से पार्टी हाईकमान को भी विधायकों और दायित्वधारियों की किसानों में पकड़ का सही अंदाजा हो गया होगा। दरअसल कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डरों पर चल रहे किसान आंदोलन की आंच तराई में भी झुलस रही है। कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों का सहयोग मिलने के साथ ही किसानों के तेवर तीखे होते जा रहे हैं। इसके जवाब में माहौल बनाने के लिए भाजपा ने किसान रैली की रूपरेखा बनाई थी।

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- फोटो : amar ujala

इसमें किसानों की नाराजगी वाली तराई की नौ विधानसभाओं और नैनीताल की तीन विधानसभाओं को चिह्नित कर विधायकों, दायित्वधारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके लिए भाजपा का रैली के लिए सबसे पसंदीदा स्थान मोदी मैदान को चुना गया था। भाजपा ने रैली में पांच हजार लोगों के पहुंचने का लक्ष्य रखा था, लेकिन रैली में इससे काफी कम संख्या में ही लोग पहुंच पाए और इनमें कार्यकर्ताओं की भरमार थी। 

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- फोटो : amar ujala

कुल मिलाकर तमाम कोशिशों के बावजूद किसानों को कानूनों के पक्ष में करने की भाजपा की कोशिश रंग नहीं ला सकी। अब देखना होगा कि किसानों के कड़े हो रहे रुख को भांप रही भाजपा कानूनों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए क्या पैंतरे आजमाती है। किसान आंदोलन में तराई से सबसे अधिक सिख आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। सिख समुदाय में आंदोलन का प्रभाव इतना व्यापक है कि मोदी मैदान में हुई रैली में सिर्फ गिनती के ही सिख दिखाई दिए। 

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- फोटो : ट्विटर

किसान रैली से माहौल बनाने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को विशेष रूप से संबोधन के लिए बुलाया गया था, लेकिन केंद्रीय मंत्री के कद के अनुरूप संगठन के लोग और विधायक भीड़ जुटा पाने में असफल रहे। पार्टी के नेता भीड़ कम होने की वजह अधिक ठंड का होना बताते रहे।

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