चमोली: चट्टान टूटने से दहशत में भदाकोटी गांव के लोग, रातभर नहीं सो पाए ग्रामीण, राइंका बैरागना को भी खतरा
भदाकोटी गांव में सोमवार रात बारिश के बीच चट्टान टूटने से अचानक मलबा और बोल्डर गदेरे में आ गए। गदेरे का पानी घरों में घुसने और लगातार खतरे के बीच ग्रामीणों ने रातभर जागकर गुजारी, वहीं मंगलवार को मलबे के कारण चमोली-कुंड हाईवे भी दिनभर बाधित रहा।
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मंडल घाटी के बैरागना ग्राम पंचायत के भदाकोटी गांव के पीछे सोमवार रात चट्टान टूटने से हुए भूस्खलन के बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई। चट्टान से छिटके बोल्डर और भारी मलबा गांव के समीप गदेरे में आ गया, जिससे जलस्तर बढ़ गया। गदेरे का पानी कई घरों में घुसने से ग्रामीण रातभर सो नहीं पाए। मंगलवार को गदेरे में मलबा आने से चमोली-कुंड हाईवे भी दिनभर बाधित रहा।
ग्राम प्रधान सृष्टि राणा ने बताया कि भदाकोटी गांव में 22 परिवार रहते हैं। सोमवार रात तेज बारिश के दौरान गांव के पीछे चट्टान से भूस्खलन हुआ और मलबा गांव की ओर आ गया। गदेरे का पानी पूर्व प्रधान महावीर सिंह राणा, रजत राणा, सतेंद्र सेमवाल, नंदकिशोर सेमवाल, हीरा सिंह राणा और जयकृत राणा के घरों में घुस गया। जिससे घरों में रखा सामान भी नष्ट हो गया। गांव के आठ आवासीय भवनों को अब भी गदेरे से खतरा बना हुआ है।
वहीं, राजकीय इंटर कॉलेज बैरागना के भवन भी भूस्खलन की जद में आने की आशंका है। रात करीब दो बजे बारिश धीमी पड़ने और गदेरे का जलस्तर कम होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
गदेरे में अटके बोल्डर से ग्रामीणों की चिंता बढ़ी
बैरागना गांव के बीचों-बीच बह रहे गदेरे में अभी भी एक भारी-भरकम बोल्डर अटका हुआ है। ग्रामीणों को बोल्डर के लुढ़कने की आशंका है। ग्राम प्रधान सृष्टि राणा ने बताया कि क्षेत्रीय पटवारी मंगलवार को मौके पर गए थे। बोल्डर को हटाने को लेकर प्रशासन से वार्ता की गई है। उन्होंने चमोली-कुंड हाईवे पर पुलिया या कॉजवे निर्माण की मांग उठाई है।
दिनभर बाधित रहा हाईवे
बैरागना में चमोली-कुंड हाईवे पर भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से मंगलवार को दिनभर वाहनों की आवाजाही बाधित रही। मंडल क्षेत्र के छात्र-छात्राएं भी राइंका बैरागना नहीं पहुंच पाए। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि एनएच की जेसीबी मशीनों से मलबा हटाकर अपराह्न सवा पांच बजे हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया।
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गंदा पानी जाने से 100 से अधिक मछलियां मरीं
बैरागना में मत्स्य पालन विभाग की हैचरी में बने तालाबों में बालखिला नदी से पानी की आपूर्ति होती है। गदेरे में भारी मलबा और बोल्डर आने से पानी की नहर का रुख बदल गया और गंदा पानी मत्स्य तालाबों में पहुंच गया। इससे 100 से अधिक मछलियां मर गईं।
मत्स्य निरीक्षक दीपक कुमार ने बताया कि मलबा आने से नहर को भी क्षति पहुंची है। जेसीबी की मदद से नहर में जमा मलबा हटाया गया है। मछलियों के मरने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।