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उत्तराखंडः कुछ ऐसा रहा तीरथ सिंह रावत के गांव की पगडंडी से मुख्यमंत्री तक का सफर, पढ़िए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 10 Mar 2021 04:21 PM IST
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उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड के अगले मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत गांव की पगडंडी से ऐसे ही सीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंचे हैं। यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया है।
2019 के लोकसभा चुनाव में तीरथ ने गढ़वाल संसदीय सीट से संसदीय राजनीति में पहला कदम रखा था। पौड़ी-गढ़वाल सीट पर भाजपा प्रत्याशी तीरथ सिंह रावत ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मनीष खंडूड़ी को हराया था। तीरथ को 506980 और मनीष खंडूरी को 204311 वोट मिले थे।
गांव की पगडंडियों से शुरू हुआ उनका यह सफर धैर्य, सहनशीलता, कर्मठ कार्यकर्ता की उनकी छवि को और मजबूत बनाता गया। अभाविप कार्यकर्ता के रूप में राजनीति शुरू करने वाले तीरथ का अभिभाजित उत्तर प्रदेश और उसके बाद उत्तराखंड की राजनीति में विशेष दखल रहा है।
जनपद पौड़ी के कल्जीखाल ब्लॉक के सीरों गांव के मूल निवासी तीरथ रावत का राजनीतिक सफर संघर्षपूर्ण रहा है।
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गढ़वाल विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
स्व. कलम सिंह रावत के सबसे छोटे बेटे तीरथ ने गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर श्रीनगर से छात्र राजनीति शुरू की। वर्ष 1992 में वह सबसे पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से गढ़वाल विवि बिड़ला परिसर श्रीनगर के छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़े और जीते।
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तीरथ सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
इसके बाद वे अभाविप के प्रदेश संगठन मंत्री, भाजयुमो में प्रदेश उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रहे। वर्ष 1997 में वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य के सदस्य निर्वाचित हुए। पृथक राज्य उत्तराखंड का गठन होने पर वर्ष 2000 में राज्य की अंतरिम सरकार में तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड के पहले शिक्षा मंत्री बने। वर्ष 2007 में भाजपा प्रदेश महामंत्री, प्रदेश सदस्यता प्रमुख, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के अध्यक्ष चुने गए।
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तीरथ सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
वर्ष 2012 में विधानसभा चौबट्टाखाल से विधायक चुने जाने के बाद वर्ष 2013 में उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। वर्ष 2017 में सिटिंग विधायक होते हुए टिकट कटने के बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी सौंपी। वर्तमान में तीरथ हिमाचल प्रदेश के प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। रामजन्मभूमि आंदोलन में दो माह तक जेल में रहे तीरथ ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
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तीरथ सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
नवनिर्वाचित गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी और प्रत्याशी के रुप में शत-प्रतिशत परिणाम दिए। तीरथ को 2013 में भाजपा के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में गईं।
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