{"_id":"6022c3a58ebc3e74ab20315e","slug":"uttarakhand-chamoli-glacier-burst-news-american-scientists-shared-shocking-pictures-of-disaster","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"अमेरिकी वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में सामने आई चमोली आपदा की ये वजह, साझा कीं चौंकाने वाली तस्वीरें...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमेरिकी वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में सामने आई चमोली आपदा की ये वजह, साझा कीं चौंकाने वाली तस्वीरें...
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 10 Feb 2021 02:13 AM IST
विज्ञापन
1 of 5
अमेरिकी वैज्ञानिकों की ओर से साझा की गई तस्वीर
- फोटो : https://blogs.agu.org/
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
उत्तराखंड के चमोली की नीती घाटी में आई भयावह प्राकृतिक आपदा भूस्खलन के साथ ही लाखों टन बर्फ के नीचे खिसकने का दुष्परिणाम है। यह मानना है वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित संस्था अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन का। संस्था की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस जगह प्राकृतिक आपदा आई, वहां 5600 मीटर की ऊंचाई से पहाड़ की हजारों टन वजनी बड़ी-बड़ी चट्टानें व लाखों टन बर्फ सीधे 3800 मीटर तक नीचे जा गिरीं।
2 of 5
अमेरिकी वैज्ञानिकों की ओर से साझा की गई तस्वीर
- फोटो : https://blogs.agu.org/
कई हजार टन वजनी भारी भरकम चट्टानों और लाखों टन बर्फ के नीचे तेजी से गिरने की वजह से भयावह आपदा आई और काफी जनहानि के साथ ही करोड़ों का आर्थिक नुकसान हुआ। चमोली की नीती घाटी में आई भयावह आपदा पर वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, इसरो, डीआरडीओ समेत देश के तमाम वैज्ञानिक संस्थानों के साथ ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान समेत यूरोप के कई देशों के वैज्ञानिकों की टीमें तमाम पहलुओं को लेकर अध्ययन कर रही हैं।
3 of 5
अमेरिकी वैज्ञानिकों की ओर से साझा की गई तस्वीर
- फोटो : https://blogs.agu.org/
अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के वैज्ञानिकों का मानना है कि हजारों टन वजनी चट्टानों व लाखों टन बर्फ के सीधे दो किलोमीटर तक लगातार नीचे गिरने की वजह से इलाके में तापमान तेजी से बहुत अधिक बढ़ गया और इस तापमान के चलते बर्फ तेजी से पिघल गई। परिणामस्वरूप नदी में अचानक जलप्रलय आ गई जिसकी वजह से भारी तबाही हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 5
चमोली में आपदा के बाद का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
चमोली आपदा को लेकर शोध कर रहे अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के कई वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि जिस तरीके से पूरी दुनिया में पर्यावरण में बदलाव हो रहा है और जलवायु परिवर्तन के तमाम दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में चमोली जैसी प्राकृतिक आपदाएं भविष्य में और बढ़ेंगी जिसके लिए दुनिया के सभी देशों को ना सिर्फ सतर्क रहना होगा, वरना ऐसी आपदाओं को रोकने को लेकर अधिक से अधिक मॉनीटरिंग की जरूरत होगी।
विज्ञापन
5 of 5
चमोली में आपदा के बाद का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन के वैज्ञानिकों ने आपदा के बाद केंद्र व राज्य सरकार की ओर से चलाए गए अभियान की भी सराहना की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आपदा के बाद तत्काल बाद केंद्र व राज्य सरकार के साथ ही तमाम वैज्ञानिक संस्थानों के वैज्ञानिकाें ने जिस गति से रेस्क्यू अभियान चलाया वह सराहनीय है। वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 2012 में नेपाल में आई आपदा के बाद सरकार को अभियान शुरू करने में कई दिन लग गए थे। इतना ही नहीं वैज्ञानिकोें ने आपदा के बाद लापता लोगों के सुरक्षित बचने की भी कामना की है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।