उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित पुलिस परेड के बाद बारी आई विभिन्न दस्तों की परेड और साहसिक करतबों की। शुरूआत हुई श्वान दल (डॉग स्क्वायड) की लूसी से। लूसी ने मुख्य अतिथि को फूलों का गुलदस्ता भेंटकर स्वागत किया। इसके बाद डॉग स्क्वायड ने बारी-बारी से अपने करतब दिखाने शुरू किए।
स्वागत के बाद लूसी ने एक संदिग्ध को भीड़ में से दबोचने का प्रदर्शन भी किया। दूर बैठे एक व्यक्ति को पहले तो लूसी ने पहचाना और जब वह भागा तो पीछे दौड़कर उसे दबोच लिया। लूसी की पकड़ इतनी मजबूत थी कि तीन पुलिसकर्मियों के जुटने के बाद व्यक्ति को छुड़ाया जा सका।
इसके बाद एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस) की टीम ने भी दो डेमो दिखाए। तेज धमाके के साथ शुरू हुए इस प्रदर्शन ने एक बार तो सबको हिलाकर रख दिया। डेमो एक वीआईपी को आतंकवादियों के चंगुल से छुड़ाने का था। एटीएस की टीम ने हेलीकॉप्टर से उतरने (प्रतीकात्मक हेलीकॉप्टर) का प्रदर्शन किया।
इसके बाद एक-एक कर टीम के सदस्य वीआईपी को छुड़ाने के लिए एक झोपड़ीनुमा जगह पर पहुंचे। दूर से कई स्नाइपरों ने आतंकियों की हरकतों पर नजर रखी। सकुशल बंधक को छुड़ाया गया, लेकिन भागते हुए एक आतंकी ने बस को हाईजैक कर लिया। एटीएस की टीम ने महज तीन मिनट के इस डेमो में बस में बैठे पर्यटकों को रेस्क्यू करने का प्रदर्शन भी किया।
घुड़सवार पुलिस के दस्ते ने भी अपना दमखम दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। करीब 50 से 60 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ते रुस्तम, चंचल आदि घोड़ों पर सवार पुलिसकर्मियों ने भाले से निशाने साधे। तीन-तीन निशाने एक साथ साधने का करतब भी घुड़सवारों ने दिखाया। पुलिस के घोड़ों की इस तेजी को देखकर हर कोई दंग रह गया।