पहाड़ों की रानी मसूरी में दशकों पुरानी जर्जर इमारतें बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सैकड़ों परिवार आज भी ऐसी बदहाल इमारतों में रह रहे हैं। जिला प्रशासन ने नगर पालिकाओं को जर्जर भवनों का सर्वे कर चिह्नीकरण करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकांश भवन एक-दूसरे से सटे हुए हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए हादसों के बाद मसूरी के लोगों की चिंता भी बढ़ी है। प्रशासन ने भवनों की वास्तविक स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराने को कहा है। उन्हें गिरासू घोषित करने की कार्रवाई में तकनीकी और विधिक पहलुओं का ध्यान रखा जाएगा।
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मसूरी में जर्जर भवन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि यदि इन भवनों को खाली कराया गया तो सैकड़ों परिवार कहां जाएंगे। मसूरी में जमीन की उपलब्धता सीमित है और किराये के मकान महंगे हैं। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के भवन खाली कराना प्रशासन के लिए चुनौती होगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मरम्मत और पुनर्निर्माण के नियमों में ढील देने की मांग की है।
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मसूरी में जर्जर भवन
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लंढौर निवासी संदीप अग्रवाल ने कहा कि बाजार क्षेत्र में कई भवनों की हालत बेहद खराब है। उन्होंने जर्जर भवनों के चिह्नीकरण को जरूरी बताया लेकिन आवास संकट पर चिंता जताई। संदीप अग्रवाल ने प्रशासन से नियमों का सरलीकरण करने का आग्रह किया। स्थानीय निवासी मनोज अग्रवाल ने कहा कि कई बहुमंजिला भवन डेढ़ सौ साल तक पुराने हैं। मसूरी संवेदनशील क्षेत्र है और लोग हमेशा डर में रहते हैं।
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मसूरी में जर्जर भवन
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नगर पालिका अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि दिल्ली में भवन हादसे के बाद पालिका प्रशासन भी मामले को लेकर गंभीर है। जिलाधिकारी ने बैठक लेकर नगर पालिकाओं को जर्जर भवनों का सर्वे और चिह्नीकरण करने के निर्देश दिए हैं।
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मसूरी में जर्जर भवन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने बताया कि पालिका की ओर से पूर्व में भी सीवीआरआई के माध्यम से गिरासू भवनों का सर्वे कराया जा चुका है, जिस पर कार्रवाई गतिमान है। आगे भी इस संबंध में कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में गिरासू पाए जाने वाले भवनों का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए इंजीनियरों के माध्यम से भवनों की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाएगी।