उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे महंत योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। आज उनका जन्मदिन है। आइए, जानते हैं इनके सीएम से संन्यासी बनने की कहानी।
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संन्यासी से सीएम बनने तक कुछ ऐसी है योगी आदित्यनाथ की संघर्ष भरी कहानी...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 07 Jun 2018 06:52 AM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
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मुख्यमंत्री योगी
उत्तराखंड के छोटे से कस्बे कोटद्वार में 1991 के छात्र संघ चुनाव में यदि योगी आदित्यनाथ को हार का सामना नहीं करना पड़ता, तो शायद वक्त उन्हें आज योगी की पहचान के साथ इस बुलंदी पर नहीं ले जा पाता। कोटद्वार डिग्री कालेज में मिली इस छोटी सी हार ने उनके सामने भविष्य का सुनहरा रास्ता खोल दिया।
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- फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के लाल महंत योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। यह पहला मौका नहीं है, जब उत्तर प्रदेश में उत्तराखंड का कोई मुख्यमंत्री बना हो। गोविंद वल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा और एनडी तिवारी यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
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yogi shah
पांच जून 1972 को पौड़ी गढ़वाल के पंचेर गांव में नंद सिंह बिष्ट के घर योगी का जन्म हुआ था। उनका वास्तविक नाम अजय मोहन सिंह है। गढ़वाल विश्वविद्यालय से उन्होंने बीएससी की डिग्री हासिल की। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रखर कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहे। 22 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना परिवार त्याग दिया और गोरखपुर चले गए।
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सीएम याेगी अादित्यनाथ
बाद में गोरखपुर में महंत अवैद्यनाथ के समाधिस्थ होने पर वह गोरक्षपीठाधीश्वर बने। बारहवीं लोक सभा (1998-99) में मात्र 26 वर्ष की आयु में वह सबसे कम उम्र के सांसद बने। 1991 के छात्र संघ चुनाव में पराजय के बाद वे इस कदर आहत हो गए, कि उन्होंने अपने मामा महंत अवैद्यनाथ को पत्र लिखकर गोरखपुर बुलाने का अनुरोध किया। गोरखपुर पहुंचने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अजय बिष्ट से योगी आदित्यनाथ होकर आज यूपी के सीएम तक का सफर कर लिया।