हंसमुख स्वभाव और विवेकशील कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले अक्षत गुप्ता ने बतौर डीएम अपने ऊधमसिंह नगर में सात माह के कार्यकाल में जनपद को एक अलग पहचान दिलाई थी। अनाथ, गरीबों और बेसहारा लोगों के उत्थान पर उनका विशेष फोकस रहा। उन्होंने जब से जनपद में कार्यभार संभाला तभी से अनाथ और दीन-हीन बच्चों को एक अभिभावक के रूप में मसीहा मिल गया था। वर्तमान में गरीब बच्चों के लिए कई जिलों में चलाई जा रही मिशन आरोहण पोषण योजना अक्षत गुप्ता की ही देन है।
एक IAS अफसर जो था गरीब और बेसहारा लोगों का मसीहा
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udham singh nagar DM akshat gupta
अक्षत गुप्ता बेसहारा बच्चों की शिक्षा और उनके पोषण को लेकर इतने चिंतित रहते थे कि वह स्वयं तो समय समय पर इन बच्चों से मिलते ही थे साथ ही अपनी धर्म पत्नी रिद्धिम अग्रवाल को भी इन बच्चों का हाल जानने के लिए भेजते थे। इन बच्चों के लिए उनके भागीरथ प्रयासों का ही परिणाम है कि आज जनपद के सैकड़ों अनाथ और बेसहारा बच्चों का सही पालन
पोषण हो रहा है।
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वर्तमान में यूएस नगर के एसएसपी अनंत शंकर ताकवाले के साथ ही आईएएस अक्षत गुप्ता ने देहरादून के मसूरी में वर्ष 2006
में ट्रेनिंग ली थी। एसएसपी ताकवाले को जैसे ही यह दुखद सूचना मिली उनकी भी आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि अक्षत जी के साथ उन्होंने देहरादून के मसूरी में 2006 में ट्रेनिंग की थी। अक्षत गुप्ता के बारे में बताते हुए एसएसपी ताकवाले भरे मन से कहते हैं कि उनका शुरू से ही हंसमुख व्यवहार और काम के प्रति गंभीरता रहती थी। कई बार ट्रेनिंग में उन्हें अहम बिंदुओं पर गंभीरता से सोचते हुए भी देखा था। अपनी ट्रेनिंग टीम में वह बेहद स्मार्ट और काफी मिलनसार थे।
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दया भाव और न्यायप्रिय शैली आईएएस अक्षत गुप्ता की विशेष पहचान थी। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान श्रमिकों को न्याय
दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। गरीब और श्रमिक वर्ग जो भी उनके पास न्याय की आस लेकर आया, उसे कभी भी उन्होंने निराश नहीं किया। कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले लोग उनके दयाभाव के कायल थे। जितने समय भी वह कार्यालय में रहे उन्हें किसी ने कभी गुस्से में नहीं देखा। हमेशा चेहरे पर मुस्कुराहट रखने वाले अक्षत गुप्ता का अचानक इस दुनिया से विदा हो जाना आज जिले के हर शख्स को खल रहा है।
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रुद्रपुर जिले में औद्योगिक शांति बनाने में भी अक्षत गुप्ता ने अहम भूमिका निभायी थी। 6 नवंबर 2015 को जिलाधिकारी के रूप में जनपद की कमान संभालने के बाद उन्होंने यहां के औद्योगिक परिवेश को देखते हुए औद्योगिक शांति बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया। आये दिन होने वाली श्रमिकों की हड़ताल को उन्होंने न सिर्फ गंभीरता से लिया, बल्कि मुद्दों की तह तक जाकर मामलों को सावधानी से निपटाया।