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नोट बंदी से उत्तराखंड के इस गांव में हुए भुखमरी जैसे हालात

Mon, 21 Nov 2016 03:31 PM IST
विनोद काला/ अमर उजाला, बनबसा (चंपावत)
विनोद काला/ अमर उजाला, बनबसा (चंपावत) Updated Mon, 21 Nov 2016 03:31 PM IST
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this village facing starvation due to currency ban
village - फोटो : amar ujala

नोटबंदी से नेपाल सीमा पर बनबसा के फागपुर गांव की अर्थव्यवस्था पूर्व सैनिकों और सेना की छावनी के ईद-गिर्द घूमने को विवश है। इस अंबेडकर गांव में निर्धन और दलित वर्ग का जीवन तो जैसे थम सा गया है। यहां भुखमरी जैसे हालात हैं।

this village facing starvation due to currency ban
village - फोटो : amar ujala

नोटबंदी से मजदूर वर्ग बेरोजगार हो गया है। दिहाड़ी पर काम करने वालों को उधार पर जीवन यापन करने को विवश होना पड़ रहा है। बार्टर सिस्टम (सामान के बदले सामान) पर दो वक्त की रोटी मिल रही है। सब्जी उत्पादक ओमप्रकाश के मुताबिक दुकान पर सब्जी देकर बदले में दैनिक उपभोग की वस्तुएं ले रहे हैं।

this village facing starvation due to currency ban
narayan ram - फोटो : amar ujala

आखिर कब तक चलेगा उधार पर कारोबार? यह कहना है अंबेडकर ग्राम फागपुर निवासी नारायण राम का। छोटी सी दुकान चलाने वाले नारायण कहते हैं कि नोटबंदी ने कारोबार ठप कर दिया है। पास में पैसे न होने से व्यापारियों ने भी सामान देना बंद कर दिया है। कहते हैं कि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो दुकान बंद करने को विवश होना पड़ेगा।  

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this village facing starvation due to currency ban
ramesh ram - फोटो : amar ujala

नोटबंदी ने तो फागपुर नई बस्ती निवासी रमेश राम के परिवार के आगे भुखमरी पैदा कर दी है। हरियाणा में किसी मेस में कुक का काम करने वाले रमेश ने बताया कि नोटबंदी के चलते मालिक को मेस बंद करनी पड़ी। बताया कि यहां भी नोटबंदी के चलते काम नहीं मिल पा रहा है। इसी बीच बेटा बीमार पड़ा तो पैसे की तंगी से इलाज में दिक्कतें आईं। उधार में भी मिला तो एक हजार का नोट जिसे हर किसी ने लेने से मना कर दिया। बनबसा के एक डॉक्टर से उधार में बेटे का उपचार कराया।

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this village facing starvation due to currency ban
dilip singh rawat

अंबेडकर ग्राम फागपुर में छोटी सी दुकान, साइकिल मरम्मत के साथ कुटीर उद्योग के तहत मोमबत्ती बनाने वाले दिलीप सिंह रावत का कहना है कि दुकान और साइकिल मरम्मत पर असर नहीं पड़ा है। प्रतिदिन हजार-बारह सौ की बिक्री होती थी जो बदस्तूर जारी है, लेकिन उनका मोमबत्ती बनाने का काम ठप सा हो गया है। कच्चा माल लेने में परेशानी पैदा होने के साथ ही व्यापारियों ने माल लेना बंद कर दिया है। 

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