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लंबी लड़ाई से हक पाकर पुत्रधर्म निभा गए रोहित, पिता एनडी को वाजपेयी-मुखर्जी से ऊपर मानते थे ‘गुंजनू’

Wed, 17 Apr 2019 04:36 PM IST
अलका त्यागी गौरव प्रजापति, अमर उजाला, देहरादून
गौरव प्रजापति, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 17 Apr 2019 04:36 PM IST
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Rohit shekhar tiwari Served father Nd Tiwari till death in hospital
रोहित शेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला

करीब 6 साल की कानूनी लड़ाई और पुत्र के रूप में हक मिलने के बाद चार साल लगातार बीमार पिता की 24 घंटे सेवा, और पिता के जाने के बाद छह माह के भीतर ही निधन। यह कहानी है उस रोहित शेखर तिवारी की जिसने बचपन के साथ-साथ अपनी पूरी जवानी भी पिता का साया पाने के इंतजार में पल-पल कर काट दी। जब जीवन के 34 बसंत देखने के बाद पिता ने अपना लिया तो वो उन्हें खुले दिल से माफ कर अपना दर्द भूल गया।

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रोहित शेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला

रोहित शेखर तिवारी को पिता एनडी तिवारी प्यार से गुंजनू बुलाते थे। वो कहते थे कि ‘मेरे पिता से जुड़ीं कंट्रोवर्सी नहीं, उनके द्वारा किए विकास कार्यों को देखें। मेरे पिता ने 65 साल तक देश की सेवा की है, मुझे कहने में कोई हिचक नहीं कि इस मामले में वे अटल बिहारी वाजपेयी और प्रणव मुखर्जी से भी कहीं आगे हैं।’
 

Rohit shekhar tiwari Served father Nd Tiwari till death in hospital
रोहित शेखर तिवारी - फोटो : अमर उजाला
बचपन से लेकर जवानी तक की तमाम गुजारिश, निवेदन और प्रार्थना बेअसर रही तो 2008 में करीब 28 साल की उम्र में पिता एनडी तिवारी से अपना हक पाने के लिए रोहित शेखर तिवारी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन जैसा कि इल्म था एनडी ने उन्हें इस पर भी बेटा मानने से इनकार कर दिया और फिर यहां से शुरू हुई लंबी कानूनी लड़ाई मार्च 2014 तक चली। 34 साल की उम्र में कोर्ट के आदेश के बाद एनडी ने रोहित को अपना बेटा मानकर जब उनका माथा चूमा तो वो बचपन से लेकर जवानी तक अपने पिता की छाया पाने के लिए किए अपने संघर्ष को भूल गए और पिता को पलभर में माफ कर दिया। 

 
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Rohit shekhar tiwari Served father Nd Tiwari till death in hospital
एनडी तिवारी
एनडी की स्वीकृति के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया थी ‘मैं और मेरी मां ने जो दर्द सहा है, मैं कभी नहीं चाहूंगा कि कोई और उसे झेले। मेरे पिता ने मुझे अपना मानकर गले लगा लिया, अब उनसे कोई गिला-शिकवा नहीं।’इसके बाद मां उज्ज्वला तिवारी के साथ पिता एनडी तिवारी के घर पहुंचे रोहित को उम्मीद थी कि सालों साल चला संघर्ष शायद अब सुख में बदल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। समय बीतने के साथ-साथ एनडी की तबीयत बिगड़ती गई और रोहित पूरी तन्मयता से अपना पुत्र धर्म निभाने में तल्लीन हो गए। 
 
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एनडी तिवारी

करीब तीन साल बाद सितंबर 2017 जब एनडी को ब्रेन स्टोक पड़ा तो दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उन्हें भर्ती करा दिया गया। इसके बाद तो जैसे मैक्स अस्पताल ही रोहित का दूसरा घर हो गया। उन्होंने दिन-रात 24 घंटे यहां रहकर पिता की सेवा करनी शुरू कर दी। सुबह-शाम एनडी को दवा खिलाना, डॉक्टरों से हालचाल जानना, मिलने-जुलने आने वालों को रिसीव करना और मीडिया को एनडी की कुशलक्षेम बताना ही रोहित की दिनचर्या हो गई।

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