देवभूमि उत्तराखंड में बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच स्थित इस तीर्थ स्थल में जाकर लगता है कि अगर कहीं धरती पर स्वर्ग है तो वो यहीं है। हेमकुंड साहिब यात्रा कुछ ऐसा ही अहसास कराती है। तस्वीरों में देखें...
बर्फ से ढके पहाड़ों से आगे यहां है जन्नत, तस्वीरें में देखें...
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हेमकुंड साहिब यात्रा अब पटरी पर लौट गई है।
- फोटो : amar ujala
हेमकुंड साहिब यात्रा अब पटरी पर लौट गई है। वर्ष 2013 की आपदा के बाद इस वर्ष तीर्थयात्रियों की संख्या करीब पचास फीसदी तक बढ़ी है। वजह है अच्छा मौसम और सुविधाओं में इजाफा। गोविंदघाट से पुलना तक पक्की सड़क बनने से जहां यात्रियों को तीन किमी की खड़ी चढ़ाई से निजात मिली है, वहीं आगे पैदल मार्ग में भी सुविधाएं बढ़ी हैं। अमर उजाला ने इसका जायजा लिया।
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हेमकुंड साहिब यात्रा अब पटरी पर लौट गई है।
हम जीप से महज बीस मिनट में ही पुलना गांव पहुंच गए। दरअसल अब गोविंदघाट से पुलना तक पक्की सड़क बन गई है। पहले यहां खड़ी चढ़ाई दम फुला देती थी। तीन किमी का यह पैदल सफर तय करने में ही तीन घंटे लग जाते थे। पुलना से शुरू हुई पैदल यात्रा। पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे हम हेमकुंड साहिब के पैदल ट्रैक पर निकल पड़े। पुलना से जंगल चट्टी तक पैदल मार्ग करीब छह फीट चौड़ा है। यहां एक ओर तीर्थयात्रियों को ढोते घोड़े चल रहे हैं तो दूसरी ओर पैदल तीर्थयात्री एक दूसरे का सहारा लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
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हेमकुंड साहिब यात्रा अब पटरी पर लौट गई है।
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करीब तीन किमी की दूरी एक घंटे में तय कर हम दोपहर साढ़े बारह बजे जंगल चट्टी पहुंचे। यहां डेढ़ किमी तक पैदल रास्ते के किनारे लक्ष्मण गंगा की ओर रेलिंग लगाई गई है। पुलना से जंगलचट्टी तक तीन रेन सेल्टर बनाए गए हैं, इनमें लोहे की कुर्सियां भी लगी हैं। आपदा के बाद बने ये सेल्टर यात्रियों को बड़ी राहत दे रहे हैं। तीन किमी के इस पैदल सफर में पेयजल की किल्लत यात्रियों को परेशान करती है। जंगलचट्टी पहुंचने पर ढाबों में खाने की संतोषजनक व्यवस्था है।
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हेमकुंड साहिब यात्रा अब पटरी पर लौट गई है।
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जंगलचट्टी में करीब दस मिनट का ब्रेक लेने के बाद हम निकल पड़े यात्रा के प्रमुख पड़ाव घांघरिया को। तीन किमी का सफर करीब डेढ़ घंटे का तय कर हम दोपहर दो बजे यात्रा के दूसरे पड़ाव भ्यूंडार पहुंचे। जंगल चट्टी से भ्यूंडार तक पैदल रास्ता कई जगहों पर आपदा से क्षतिग्रस्त हो गया था। अब यह रास्ता काफी हद तक ठीक हो गया है। सुधारीकरण का काम जारी है। भ्यूंडार में आपदा के निशां आज भी दिख रहे हैं। यहां लक्ष्मण गंगा में बड़े-बड़े बोल्डर अटके हुए हैं जो कभी भी हादसों का सबब बन सकते हैं।