गढ़वाल केंद्रीय विवि के सातवें दीक्षां समारोह में पहुंचे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने छात्र-छात्राओं में कुछ कर गुजरने के लिए जोश भरा। उन्होंने कहा कि एक योद्धा के जीवन में मंजिल बहुत कम आती है, पड़ाव ज्यादा आते हैं। योद्धा तभी तक रहता है, जब तक वह मंजिल पर नहीं पहुंचता, क्योंकि मंजिल तक पहुंचना एक ठहराव है।
मंजिल में योद्धा पीछे की सफलताओं का आकलन करता है और प्रसन्न होता है, जबकि पड़ाव में वह कर गुजरने वाली चुनौतियों का आकलन करता है। वह अपनी क्षमताओं और शक्तियों को संचित कर जीत की सफल नीतियां बनाता है। यही उनके जीवन में तरक्की का रास्ता तय करता है। कहा कि छात्रों के लिए आने वाला कल और पड़ाव ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। आज की प्राप्ति बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने के लिए उनको सदैव प्रयत्नशील रहना पड़ेगा।
मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि विवि से उपाधि लेने के बाद छात्र-छात्राओं की असली परीक्षा अब शुरू हो रही है। उनको सुनिश्चित करना है कि भारत में ज्ञान आधारित समाज बने। यह उनकी जिम्मेदारी है कि भारत विश्व गुरु बने। कहा कि छात्र सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के सूत्रपात के वाहक बनें। उनके ऊपर भारत के नवर्निर्माण की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि हमें अपनी सामुदायिक सहभागिता को विस्तृत करने की जरुरत है। विवि समाज के लिए है, समस्याओं के समाधान के लिए है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसा देश है, जो पूरे संसार को अपना परिवार मानता है। वेद एक परिवार का संदेश देते हैं। छात्र-छात्राओं को इस पर अमल करते हुए पूरे विश्व के कल्याण के लिए काम करना होगा। नालंदा जैसे विश्वविद्यालय भारत में थे, जिन्होंने पूरे विश्व को ज्ञान दिया।
दीक्षांत समारोह में परास्नातक (पीजी) स्तर पर 45 टॉपर्स छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल वितरित किए गए, जबकि पीजी और पीएचडी के 418 छात्र-छात्राओं को उपाधि वितरित की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को डी-लिट की मानद उपाधि से नवाजा गया। जिसमें दानदाताओं की ओर से भी 15 गोल्ड मेडल वितरित किए गए। वहीं पीएचडी के लगभग 85 और पीजी के 333 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की गई।