विश्व प्रसिद्घ इस मंदिर में मुसलिम की आरती से खुश होते हैं भगवान
देश में असहिष्णुता पर आरोप-प्रत्यारोप के दौर में उत्तराखंड में सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी मिसाल सामने आई है जो देश में अन्यत्र मिलनी कठिन है।
विश्व प्रसिद्घ इस मंदिर में मुसलिम की आरती से खुश होते हैं भगवान
चार धामों में से एक बदरीनाथ धाम में मंदिर हर रोज गाई जाने वाली आरती एक मुसलिम द्वारा रचित है। यह आरती लगभग डेढ़ सौ वर्षों से गाई जाती है।
विश्व प्रसिद्घ इस मंदिर में मुसलिम की आरती से खुश होते हैं भगवान
बदरीनाथ धाम में ही नहीं, बल्कि देवभूमि के ज्यादातर घरों में भी इस आरती का गायन होता है, यही नहीं धर्मप्रेमियों ने तो इसे अपने मोबाइल की रिंग टोन भी बनाया हुआ है। हालांकि ज्यादातर लोग इसके रचियता को नहीं जानते।
विश्व प्रसिद्घ इस मंदिर में मुसलिम की आरती से खुश होते हैं भगवान
यूं तो प्रसिद्ध कवि सैय्यद इब्राहिम रसखान द्वारा 16वीं शताब्दी में रचित कृष्ण छंदों से लोग परिचित हैं। साथ ही अन्य मुस्लिम कवियों, लेखकों ने भी हिंदू देवी-देवताओं पर भक्तिपूर्ण लेखन किया है, लेकिन किसी मंदिर की आरती के रूप में शुमार संभवत: यह देशभर में अकेला उदाहरण है। जहां प्रसिद्ध सिद्धपीठ में प्रतिदिन की जाने वाली आरती के रूप में मान्यता मुंशी नसीरुद्दीन की रचना को दी गई है।
विश्व प्रसिद्घ इस मंदिर में मुसलिम की आरती से खुश होते हैं भगवान
इतिहासकार प्रो. अजय रावत बताते हैं कि मुंशी नसीरुद्दीन ने श्री बद्री महात्म्य पुस्तक में ‘स्तुति श्रीबदरीनाथ की’ शीर्षक से 1867 में प्रकाशित कराई थी। इसका प्रकाशन ज्वाला प्रकाश यंत्रालय में कराया गया था। इसमें वशिष्ठ अरूंधति संवाद अध्याय-2 भी शामिल है।