अमर उजाला की ओर से मातृ दिवस की पूर्व संध्या पर अमर उजाला कार्यालय में महिलाओं के लिए संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्र की महिलाओं ने भाग लिया। साथ ही उन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
इनमें शिक्षा, समाज सेवा, व्यवसाय, पुलिस, अग्निशमन, कला, साहित्यकार आदि क्षेत्रों की महिलाएं शामिल रहीं। इस दौरान प्रतिभागी महिलाओं ने अपने जीवन के संघर्ष, चुनौतियों और सफलता की कहानियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि कैसे कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर अपनी अलग पहचान बनाई। महिलाओं ने समाज में अपनी भूमिका, परिवार और कार्यक्षेत्र के बीच संतुलन और नई पीढ़ी को सशक्त बनाने जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
साहित्यकार भारती पांडे ने बताया कि तनावपूर्ण परिस्थितियों और दिव्यांग बेटे की जिम्मेदारी के बीच भी उन्होंने लेखन नहीं छोड़ा। वहीं दीपवीर कौर ने कहा कि सरकारी नौकरी का विकल्प होने के बावजूद उन्होंने अपना स्कूल शुरू करने का निर्णय लिया और आज कई बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। साथ ही थिएटर कलाकार सुमन काला ने घरेलू तनावपूर्ण माहौल के बावजूद रंगमंच से जुड़े रहने के संघर्ष को साझा किया। अग्निशमन विभाग से जुड़ी शिवानी ने जिम्मेदारियों और कठिन ट्रेनिंग के अनुभव बताए।
2 of 5
अमर उजाला संवाद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने बताया कि उनके पति भी आर्मी में हैं और उनका एक छह महीने का बच्चा है। उन्होंने घर परिवार और काम के साथ अपने बच्चे की भी दोहरी जिम्मेदारी निभाई।
3 of 5
अमर उजाला संवाद में अपनी बात रखती महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
साथ ही हेमलता राणा के पति के निधन के बाद संघर्षों के बीच थिएटर और नृत्य के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए अपनी डांस अकादमी स्थापित करने का कहानी साझा की। इसके अलावा गीता ध्यानी ने भी अपनी डांस और जुंबा से महिलाओं को स्वस्था बना रही हैं। बताया उन्होंने दो महिलाओं से शुरू किया था और आज उनके साथ 40 से 75 साल तक की 50 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं।
4 of 5
संवाद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विशाखा ने गर्भावस्था के दौरान निभाई केदारनाथ यात्रा की जिम्मेदारी
कार्यक्रम में कमांडेंट आईआरबी द्वितीय विशाखा अशोक भरणे ने अपने संघर्ष के दोनों को याद करते हुए बताया कि केदारनाथ यात्रा के दौरान वह एसपी पद पर तैनात थीं। उस समय एक ओर उन्हें अपनी गर्भावस्था का भी ध्यान रखना पड़ रहा था इसके बावजूद उन्होंने अपनी ड्यूटी को आगे रखा और हर तरह की परिस्थितियों को संभाला। उन्होंने अपने कर्तव्यों को पूरी जिम्मेदारी से निभाया।
5 of 5
अमर उजाला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रांजलि को जानवरों के प्रति लगाव ने बनाया वन अधिकारी
राजाजी टाइगर रिजर्व में एसीएफ के पद पर कार्यरत चित्रांजलि ने बताया कि उन्हें बचपन से ही जानवरों से बेहद लगाव था। उनके घर में भी छह कुत्ते हैं। इसी शौक ने उन्हें वन्यजीव और वन विभाग में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। हालांकि उनकी नौकरी भी आसान नहीं थी उन्होंने कहा कि त्योहारों और खास अवसरों पर नाकाबंदी हो जाती है और उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उसके बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ मना रही हैं।
ये भी पढे़ं...Dehradun: जनगणना ड्यूटी में लापरवाही, 12 कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, दून नगर निगम का प्रदर्शन सबसे खराब