नवरात्र शुरु होने से पहले आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में जिसके तेज ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों का ध्यान खींच रखा है। नासा के वैज्ञानिक इस जगह के चार्ज होने के कारणों और प्रभावों पर शोध कर रहे हैं।
{"_id":"59c242ed4f1c1bb2688b57d7","slug":"most-mysterious-temple-of-maa-durga","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"दुनियाभर के वैज्ञानिकों को अपनी ओर खींच रहा है देवी मां के इस मंदिर का तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुनियाभर के वैज्ञानिकों को अपनी ओर खींच रहा है देवी मां के इस मंदिर का तेज
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 21 Sep 2017 08:10 AM IST
विज्ञापन
kasar devi temple
Trending Videos
kasar devi temple
पर्यावरणविद डॉक्टर अजय रावत ने भी लंबे समय तक इस पर शोध किया है। उन्होंने बताया कि कसारदेवी मंदिर के आसपास वाला पूरा क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है, जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है। इस पिंड में विद्युतीय चार्ज कणों की परत होती है जिसे रेडिएशन भी कह सकते हैं।
kasardevi temple
पिछले दो साल से नासा के वैज्ञानिक इस बैल्ट के बनने के कारणों को जानने में जुटे हैं। इस वैज्ञानिक अध्ययन में यह भी पता लगाया जा रहा है कि मानव मस्तिष्क या प्रकृति पर इस चुंबकीय पिंड का क्या असर पड़ता है। अब तक हुए इस अध्ययन में पाया गया है कि अल्मोड़ा स्थित कसारदेवी मंदिर और दक्षिण अमेरिका के पेरू स्थित माचू-पिच्चू व इंग्लैंड के स्टोन हेंग में अद्भुत समानताएं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
kasardevi temple
इन तीनों जगहों पर चुंबकीय शक्ति का विशेष पुंज है। डॉ. रावत ने भी अपने शोध में इन तीनों स्थलों को चुंबकीय रूप से चार्ज पाया है। उन्होंने बताया कि कसारदेवी मंदिर के आसपास भी इस तरह की शक्ति निहित है।
विज्ञापन
kasardevi temple
स्वामी विवेकानंद ने 1890 में ध्यान के लिए कुछ महीनों के लिए आए थे। बताया जाता है कि अल्मोड़ा से करीब 22 किमी दूर काकड़ीघाट में उन्हें विशेष ज्ञान की अनुभूति हुई थी। इसी तरह बौद्ध गुरु लामा अंगरिका गोविंदा ने गुफा में रहकर विशेष साधना की थी। हर साल इंग्लैंड से और अन्य देशों से अब भी शांति प्राप्ति के लिए सैलानी यहां आकर कुछ माह तक ठहरते हैं।