कोरोना महामारी से महाकुंभ में धर्मनगरी के होटल, धर्मशाला और बाजारों की रौनक गायब होने लगी है। व्यापारी वर्ग पिछले साल के लॉकडाउन और फिर स्नानों पर प्रतिबंध की मार से नहीं उबर पाया था। अब कोरोना मरीज बढ़ने से श्रद्धालुओं का आना बंद हो गया है। होटलों में यात्री ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। 14 अप्रैल के शाही स्नान के दिन 58 कमरे वाले होटल के मात्र 18 कमरे किराए पर चढ़े थे। वहीं शुक्रवार को मात्र आठ कमरों में यात्री ठहरे थे।
महाकुंभ 2021: हरिद्वार में शाही स्नान के बाद बाजारों से रौनक गायब, होटल भी खाली, तस्वीरें...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार की गलत नीतियों के चलते एक बार फिर से धर्मनगरी से यात्रियों की संख्या हर दिन कम होती जा रही है। हरिद्वार के फिर से लॉकडाउन जैसे हालात बनने लगे हैं। सरकार को यात्रियों को हरिद्वार तक लाने में सकारात्मक पहल शुरू करनी चाहिए।
- दीपक कपूर, दुकानदार
14 अप्रैल तक तो कुछ श्रद्धालु नजर आ भी आ रहे थे, जिससे कुछ बिक्री हो जा रही थी, लेकिन शाही स्नान के बाद तो यात्री बहुत कम दिख रहे हैं। इससे उनकी दुकानदारी भी बेहद कम रह गई है। ऐसे में तो वह फिर से सड़क पर आ जाएंगे।
- दीपक सिंह, दुकानदार
आस्था का महापर्व महाकुंभ चलने के बाद भी होटल व्यवसाय की हालत खस्ता हो गई है। यात्रियों के धर्मनगरी में न आने से कर्मचारियों और अन्य खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। यह सबकुछ सरकार की गलत नीतियों के कारण हो रहा है।
- अंशुल जैन, होटल व्यापारी
पहले तो सरकार ने एसओपी को ही इतना सख्त बना दिया था कि यात्रियों ने उत्तराखंड से ही मुंह फेर लिया था, जो लोग आना भी चाहते थे, उन्हें नियमों का हवाला देकर बॉर्डर से वापस लौटाया जा रहा था। अब ऐसे हालातों में कौन हरिद्वार आएगा।
- अमित पंजवानी, होटल व्यापारी