आदि गुरु शंकराचार्य मठस्थली भी भू धंसाव का शिकार होने लगी है। मठस्थली में मौजूद शिव मंदिर करीब छह इंच धंस गया है और यहां रखे हुए शिवलिंग में दरारें आ गई हैं। मंदिर के ज्योर्तिमठ का माधवाश्रम आदि शंकराचार्य ने बसाया था। यहां देशभर से विद्यार्थी वैदिक शिक्षा व ज्ञानार्जन के लिए आते हैं। वर्तमान में भी 60 विद्यार्थी यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
Joshimath Is Sinking: शंकराचार्य माधव आश्रम मंदिर के शिवलिंग में आई दरारें, भू-धंसाव का बढ़ा दायरा, तस्वीरें
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कण-कण में भगवान शिव
जब मंदिर के पुराजी श्री वरिष्ठ ब्रहम्चारी से प्रतिमा खंडित होने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि भगवान शंकर कण-कण में विराजमान होते हैं। इसे खंडित नहीं माना जाता है। यहां के लिंगों का वर्णन इतिहास और पुराणों में है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार, हिमाचल में बिजलेश्वर महादेव है। जब भी बिजली कड़कती है, शिवलिंग के कई टुकड़े होते हैं। लेकिन उसे खंडित नहीं माना जाता।
जोशीमठ के नृसिंह मंदिर स्थित आदि गुरु शंकराचार्य का गद्दीस्थल भी भू धंसाव के खतरे में आ रहा है। यहां नृसिंह मंदिर परिसर में ही आदि गुरु शंकराचार्य का गद्दीस्थल है। माना जाता है कि मंदिर तो प्राचीन है ही लेकिन आदि गुरु शंकराचार्य का गद्दीस्थल भी 8वीं शताब्दी के करीब का है।
प्राचीन शैली से निर्मित यह भवन भी खतरे की जद में है। हर साल यहां से आदि गुरु शंकराचार्य की पालकी बनती है। वह गद्दी बदरीविशाल में जाती है। इसी प्रकार, पांडुकेश्वर से उद्धव और कुबेर जी की पालकी बनकर बदरीविशाल जाती है। जब कपाट बंद हो जाते हैं तो उद्धव व कुबेर जी की पालकी पांडुकेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी नृसिंह मंदिर स्थित गद्दीस्थल में लौट आती है।
नृसिंह मंदिर परिसर में फर्श धंसा, मठभवन में भी दीवारों में दरार
नृसिंह मंदिर परिसर में फर्श धंस रहा है। मठभवन में भी दीवारों में दरारें आने लगी हैं। यहां मौजूद इंजीनियर ने बताया कि यह फर्श 2017 में डाला गया था, जिसकी टाइलें बैठने लगी हैं। बताया कि पुराना कोटा भवन और नया इन्फ्रास्ट्रक्चर भी इस भू धंसाव के दायरे में आ गया है।