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Joshimath Is Sinking: शंकराचार्य माधव आश्रम मंदिर के शिवलिंग में आई दरारें, भू-धंसाव का बढ़ा दायरा, तस्वीरें

Sun, 08 Jan 2023 08:35 AM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 08 Jan 2023 08:35 AM IST
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Joshimath Is Sinking Cracks in Shivling of Shankaracharya Madhav Ashram Temple Uttarakhand Read more updates
शिवलिंग में पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला

आदि गुरु शंकराचार्य मठस्थली भी भू धंसाव का शिकार होने लगी है। मठस्थली में मौजूद शिव मंदिर करीब छह इंच धंस गया है और यहां रखे हुए शिवलिंग में दरारें आ गई हैं। मंदिर के ज्योर्तिमठ का माधवाश्रम आदि शंकराचार्य ने बसाया था। यहां देशभर से विद्यार्थी वैदिक शिक्षा व ज्ञानार्जन के लिए आते हैं। वर्तमान में भी 60 विद्यार्थी यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। 



आदि गुरु शंकराचार्य मठस्थली के भीतर ही शिवमंदिर है। इस मंदिर में वर्ष 2000 में एक शिवलिंग जयपुर से लाकर स्थापित किया गया था। मंदिर के पुजारी श्री वशिष्ठ ब्रहम्चारी ने बताया कि पिछले करीब 12-13 माह से यहां धीरे-धीरे दरारें आ रहीं थीं, जिन्हें सीमेंट लगाकर रोकने का प्रयास किया जा रहा था। लेकिन पिछले सात-आठ दिन में हालात बिगड़ने लगे हैं।

मंदिर करीब छह से सात इंच नीचे की ओर धंस चुका है। दीवारों के बीच गैप बन गया है, जिससे बाहर की रोशनी आ रही है। मंदिर में जो शिवलिंग विराजमान है, पहले उस पर चंद्रमा के आकार का निशान था जो कि अब अचानक बढ़ गया है। मंदिर के भीतर लगी टाइलें भी उखड़ गई हैं। 

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शिवलिंग में पड़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला

कण-कण में भगवान शिव
जब मंदिर के पुराजी श्री वरिष्ठ ब्रहम्चारी से प्रतिमा खंडित होने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि भगवान शंकर कण-कण में विराजमान होते हैं। इसे खंडित नहीं माना जाता है। यहां के लिंगों का वर्णन इतिहास और पुराणों में है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार, हिमाचल में बिजलेश्वर महादेव है। जब भी बिजली कड़कती है, शिवलिंग के कई टुकड़े होते हैं। लेकिन उसे खंडित नहीं माना जाता।

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जोशीमठ शंकराचार्य आश्रम - फोटो : अमर उजाला
आदि गुरु शंकराचार्य के गद्दीस्थल पर भी खतरा
जोशीमठ के नृसिंह मंदिर स्थित आदि गुरु शंकराचार्य का गद्दीस्थल भी भू धंसाव के खतरे में आ रहा है। यहां नृसिंह मंदिर परिसर में ही आदि गुरु शंकराचार्य का गद्दीस्थल है। माना जाता है कि मंदिर तो प्राचीन है ही लेकिन आदि गुरु शंकराचार्य का गद्दीस्थल भी 8वीं शताब्दी के करीब का है।


 
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दरारें - फोटो : अमर उजाला

प्राचीन शैली से निर्मित यह भवन भी खतरे की जद में है। हर साल यहां से आदि गुरु शंकराचार्य की पालकी बनती है। वह गद्दी बदरीविशाल में जाती है। इसी प्रकार, पांडुकेश्वर से उद्धव और कुबेर जी की पालकी बनकर बदरीविशाल जाती है। जब कपाट बंद हो जाते हैं तो उद्धव व कुबेर जी की पालकी पांडुकेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी नृसिंह मंदिर स्थित गद्दीस्थल में लौट आती है। 

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जोशीमठ - फोटो : अमर उजाला

नृसिंह मंदिर परिसर में फर्श धंसा, मठभवन में भी दीवारों में दरार
नृसिंह मंदिर परिसर में फर्श धंस रहा है। मठभवन में भी दीवारों में दरारें आने लगी हैं। यहां मौजूद इंजीनियर ने बताया कि यह फर्श 2017 में डाला गया था, जिसकी टाइलें बैठने लगी हैं। बताया कि पुराना कोटा भवन और नया इन्फ्रास्ट्रक्चर भी इस भू धंसाव के दायरे में आ गया है।

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