उत्तराखंड में रामनगर के तराई पश्चिमी वन प्रभाग के बैलपडाव रेंज के दाबका नदी के पास एक घायल बाघ के सिर पर खून सवार हो गया। बाघ ने बहु और ससुर को अपना निवाला बना लिया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच बाघ को भगाने के लिए कई राउंड हवाई फायर किए लेकिन वह नहीं हटा।
तस्वीरों में देखें: कैसे घायल बाघ के सिर पर सवार हुआ खून, दो को बनाया निवाला
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वनकर्मी जब जेसीबी की मदद से शवों के पास पहुंचे तो उसने जेसीबी पर भी हमला बोल दिया। कई घंटों की मशक्कत के बाद बाघ को ट्रैंकुलाइज कर इलाज के लिए नैनीताल जू भेजा गया। दोनों शवों को संयुक्त चिकित्सालय में पंचनामा भरकर मोर्चरी में रख दिया गया है।
ग्राम कादिराबाद थाना संभल जिला मुरादाबाद निवासी रामदास अपने परिवार के साथ दाबका नदी में मजदूरी का काम करता है। बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे रामदास अपनी पत्नी भगवती देवी के साथ तराई पश्चिमी वन प्रभाग के बैलपड़ाव रेंज के छोई बीट स्थित पश्चिमी चांदनी दाबका जंगल में लकड़ी लेने गया था। इस दौरान बाघ ने अचानक भगवती पर पीछे से हमला कर दिया। बाघ उसे घसीटकर जंगल में खींच ले गया। यह देख उसके साथ गए लोगों ने शोर मचाया और फोन से अन्य लोगों को सूचना दी।
सूचना मिलने पर भगवती का चचिया ससुर लखपत भी थाली बजाता हुआ जंगल में उसकी तलाश करने लगा। इसी दौरान बाघ ने 40-50 लोगों की भीड़ में से लखपत पर हमला बोल दिया और उसको भी जंगल की ओर खींच ले गया।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ, एसडीओ, रेंजर ने मौके पर पहुंचकर बाघ को भगाने के लिए कई राउंड हवाई फायर किए लेकिन वह शवों के पास से नहीं हटा।