उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वाहन चालकों के लिए कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है। वरना जुर्माना भरना पड़ सकता है।
सड़क दुघर्टनाआें के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वाहन चलाते हुए मोबाइल का प्रयोग करने वालों का लाइसेंस निरस्त करने की व्यवस्था बनाई जाए। जब तक लाइसेंस निरस्तीकरण की व्यवस्था लागू नहीं होती, ऐसे वाहन चालकों से पांच हजार रुपए जुर्माना वसूला जाए। एक जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति द्वय ने यह भी आदेश दिए हैं कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता के नियम का पुलिस सख्ती से पालन कराए। कोर्ट ने यह भी ताकीद किया कि हेलमेट आईएसआई मार्क का ही हो और नियमों के पालन के लिए एसएसपी, सीओ व कोतवाल मुख्यतौर पर जिम्मेदार होंगे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों का पालन न होने पर प्रदेश के किसी भी नागरिक को यह छूट है कि वह मामले से हाईकोर्ट को अवगत कराए। कोर्ट ने सरकार को यह आदेश भी दिए हैं कि नाबालिगों को न तो लाइसेंस जारी किए जाएं और न ही उन्हें वाहन चलाने दिए जाएं।
इस मामले में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़े अविदित नोलियाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि सरकार मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 128 व 129 का कठोरता से पालन नहीं करा रही है। इससे दुर्घटनाएं बढ़ रहीं हैं। छोटे-बड़े वाहन अपनी लंबाई से ज्यादा लंबे पोल, पाइप, सरिया आदि ले जाते हैं। इससे भी दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। वर्तमान हालात में याचिका के तथ्यों को कोर्ट ने जायज पाया। इस पर खंडपीठ ने ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन पर बातचीत करने के पर कठोर कार्रवाई, हेलमेट की अनिवार्यता का सख्ती से पालन कराने का आदेश दिया।